प्रिया की शादी हुए सिर्फ तीन महीने हुए थे। वह २२ साल की थी, टाइट बॉडी, बड़ी गांड और छोटी सी कामुक चूत जो अभी तक सिर्फ उसके पति रोहन ने छुई थी। रोहन जॉब के लिए दुबई चला गया था दो हफ्ते पहले। घर में सिर्फ प्रिया और उसके ससुरजी, रमेश शर्मा, रह गए थे। रमेश ५२ साल के थे, मजबूत बॉडी, बड़ी सी तोंद लेकिन उनका लंड अभी भी पत्थर जैसा टाइट रहता था। वह हमेशा प्रिया को ऐसे देखते थे जैसे वह उनकी निजी रंडी हो।
एक रात प्रिया किचन में खाना बना रही थी। छोटी नाइटी पहनी हुई थी, नीचे पैंटी नहीं। उसके मोटे-मोटे जांघें और गांड की शक्ल नाइटी के पीछे से साफ दिख रही थी। रमेश पीछे से आए और उसकी गांड पर अपना हाथ रख दिया।
“अरे बहू… इतनी गरम बॉडी लेकर घर में घूम रही हो। पति नहीं है तो ससुरजी से काम नहीं चलेगा क्या?”
प्रिया शॉक में आ गई। “ससुरजी… यह क्या कर रहे हो? यह गलत है!”
रमेश हंसे। “गलत? तेरी चूत तो पहले से गीली हो रही है।” उसने नाइटी ऊपर की और उसकी चूत में उंगली डाल दी। प्रिया की चूत सच में गीली थी। “देख… बहू की चूत ससुरजी के हाथ में गीली हो गई। अब तू मना नहीं कर सकती।”
उसने प्रिया को जोर से किचन काउंटर पर झुका दिया। नाइटी बिलकुल ऊपर। उसने अपना मोटा काला लंड निकाला और बिना किसी चेतावनी के सीधा उसकी चूत में घुसा दिया।
“आआआह्ह्ह… ससुरजी… निकालो… प्लीज!” प्रिया चिल्लाई, लेकिन उसकी चूत ने लंड को अंदर खींच लिया।
रमेश ने उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से पेलना शुरू किया। “चुप रंडी। आज से तू मेरी निजी बहू-रंडी है। तेरा पति दुबई में किसी को चोद रहा होगा, और मैं यहां तेरी चूत फाड़ूंगा।”
हर धक्का इतना जोर का था कि प्रिया का सिर काउंटर से टकरा रहा था। उसके मोटे जांघें कांप रहे थे। रमेश ने उसकी गांड पर थप्पड़ मारा।
“गांड ऊपर कर। अच्छे से दिखा अपनी चूत।”
प्रिया रोते हुए भी गांड ऊपर कर दी। रमेश का लंड उसकी चूत को चौड़ा कर रहा था। जल्दी ही उसने अंदर ही झड़ दिया – गरम-गरम वीर्य उसकी कोख में भर दिया।
“पहला क्रीमपाई, बहू। अब यह वीर्य अंदर रख। निकलने मत देना।”
प्रिया ने खड़े होने की कोशिश की, लेकिन उसकी टांगें कांप रही थीं। वीर्य उसकी जांघों पर बहने लगा। रमेश ने उसे लिविंग रूम में घसीट लिया।
“अब नुमाइश शुरू। कपड़े निकाल। पूरी नंगी हो जा।”
प्रिया ने रोते-रोते नाइटी उतारी। बिल्कुल नंगी। रमेश कपड़े पहने हुए थे। उसने प्रिया को बालकनी की तरफ धकेल दिया। रात के ११ बज रहे थे, नीचे गली में लोग घूम रहे थे।
“पैर फैला। अपनी क्रीमपाई वाली चूत दिखा नीचे वालों को।”
प्रिया ने शर्म से आंखें बंद कर लीं, लेकिन ससुरजी के डर से पैर फैला दिए। रमेश ने पीछे से उसकी चूत में दो उंगलियां डालकर वीर्य बाहर निकाला और उसकी जांघों पर फैला दिया।
“बोल… ‘मैं ससुरजी की रंडी हूं’।”
“म-मैं… ससुरजी की रंडी हूं,” प्रिया ने धीमी आवाज में कहा।
“जोर से, रंडी!”
“मैं ससुरजी की रंडी हूं! मेरी चूत में उनका वीर्य भरा है!”
नीचे से किसी ने सीटी मारी। रमेश हंसे और प्रिया को अंदर ले आए।
उस रात उसने प्रिया को अपने बेडरूम में ले जाकर पूरे दो घंटे चोदा। कभी उसकी चूत, कभी उसका मुंह। प्रिया को अपना वीर्य पिलाया। उसके चेहरे पर, स्तनों पर, जांघों पर झाड़ा। भुक्काके स्टाइल। प्रिया बिल्कुल वीर्य से लथपथ हो गई थी।
सुबह जब प्रिया उठी तो उसकी चूत सूजी हुई थी और जांघों पर सूखे वीर्य के निशान थे। रमेश पहले से तैयार थे।
“आज पूरे दिन तू नंगी रहेगी घर में। मैं कपड़े पहनूंगा। तू मेरी नंगी बहू।”
पूरा दिन रमेश ने उसे नंगी घुमाया। टीवी देखते समय उसकी गांड पर हाथ, खाना खाते समय उसे टेबल के नीचे लंड चुसवाया। शाम को उसने प्रिया को पूरे घर में रेंगने को कहा – नंगी, वीर्य निकालती हुई।
फिर उसने गैंगबैंग का फैसला किया।
उसने अपने चार दोस्तों को बुलाया – सब उम्र के, सब शादीशुदा। प्रिया को पता नहीं था। जब दरवाजा खुला और चार मर्द अंदर आए, प्रिया का चेहरा सफेद पड़ गया।
“ससुरजी… यह कौन हैं?”
“तेरे नए मालिक। आज तेरी चूत, गांड और मुंह सब इस्तेमाल करेंगे। फिल्म भी बनेगी।”
रमेश ने फोन पर रिकॉर्डिंग ऑन कर दी। “पोर्न मूवी शुरू। टाइटल: ससुरजी की गैंगबैंग बहू।”
पहले आदमी ने प्रिया को सोफे पर लिटाया और उसकी जांघें फैलाकर सीधा कच्चा लंड अंदर डाल दिया। “साली बहुत टाइट है अभी भी!” उसने जोर-जोर से पेला। प्रिया चिल्लाती रही लेकिन उसकी चूत गीली हो रही थी।
एक-एक करके सबने उसे चोदा। किसी ने मुंह में, किसी ने चूत में, किसी ने पहली बार उसकी गांड फाड़ी। प्रिया की गांड में लंड जाते ही वह चिल्लाई, लेकिन रमेश ने उसका मुंह बंद कर दिया अपने लंड से।
हर आदमी ने अंदर झाड़ा। क्रीमपाई के ऊपर क्रीमपाई। प्रिया की चूत से वीर्य की धार बहने लगी। फिर सबने उसके चेहरे पर, स्तनों पर, जांघों पर झाड़ा – पूरा भुक्काके। प्रिया का चेहरा सफेद वीर्य से ढक गया।
रमेश ने कैमरा अंदर किया। “अब मुस्कुरा के बोल, ‘थैंक यू ससुरजी फॉर मेकिंग मी अ गैंगबैंग रंडी’।”
प्रिया ने रोते हुए भी कहा, “थ-थैंक यू ससुरजी… फॉर मेकिंग मी अ गैंगबैंग रंडी…”
रात भर यह चलता रहा। लोग आते रहे, उसे चोदते रहे, वीर्य भरते रहे। सुबह तक प्रिया की चूत, गांड और मुंह सब सूज गए थे। वह फर्श पर पड़ी थी, पूरे शरीर पर वीर्य, जांघों के बीच से लगातार रिसाव।
रमेश ने उसके पास बैठकर उसके बाल सहलाए। “अब से हर हफ्ते यही होगा जब तेरा पति बाहर होगा। तू मेरी निजी स्लटवाइफ है। दिमागी नियंत्रण नहीं, सीधा डर और मजबूरी से। समझी?”
प्रिया ने धीरे से सिर हिलाया। “जी… ससुरजी।”
उस दिन के बाद प्रिया की जिंदगी बदल गई। हर रात ससुरजी उसे नंगी रखते। कभी पब्लिक में ले जाते – कार में चुदाई, पार्क में रात को, एक बार तो बिल्डिंग के टेरिस पर पूरी नंगी करके लोगों को दिखाया।
एक बार उसने प्रिया को पूरी नंगी ही बाजार भेजा, सिर्फ लंबे कोट में। कोट खोलकर सब्जी वाले के सामने अपनी क्रीमपाई वाली चूत दिखाने को कहा। प्रिया ने किया। अपमान का मजा रमेश को बहुत आता था।
जब रोहन वापस आया तो प्रिया ने कुछ नहीं बताया। लेकिन रात को जब रोहन उसे चोदने लगा तो उसकी चूत इतनी ढीली हो चुकी थी कि रोहन को पता ही नहीं चला। ससुरजी ने पहले ही उसे हुक्म दे रखा था – “पति के सामने नॉर्मल बनी रहना। लेकिन अंदर से तू मेरी वीर्य-डंप है।”
एक रात रमेश ने फिर से पासा जैसा खेल खेला। उसने प्रिया से कहा, “आज तू खुद फैसला कर… कितने लोगों से चुदना है।” उसने उसे पासा दिया। प्रिया ने ५ फेंका।
उस रात पांच आदमी आए। फिर से कच्ची गैंगबैंग। फिर से भुक्काके। फिर से कैमरा। प्रिया अब खुद अपनी जांघें फैलाती थी और कहती थी, “ससुरजी… मेरी चूत में वीर्य भर दो… प्लीज।”
वह अब पूरी तरह टूट चुकी थी। गंदी, बेशर्म, ससुरजी की परफेक्ट रंडी बहू।
और रमेश? वह हर रात उसे चोदते, वीर्य पिलाते, और अगले दिन उसे नॉर्मल बहू बनाकर रखते। कोई नहीं जानता था कि इस घर की बहू रात में कितनी बड़ी रंडी बन जाती है।
प्रिया अब हर बार जब भी ससुरजी का लंड देखती, उसकी चूत खुद-ब-खुद गीली हो जाती। वह जानती थी – यह जिंदगी अब ऐसे ही चलेगी। ससुरजी की गंदी, वीर्य से भरी, गैंगबैंग वाली बहू।
और उसे अब इसमें मजा आने लगा था।


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