पापा की अनुपस्थिति में माँ माँ बेटा सेक्स स्टोरी इनसेस्ट कहानी साल्टी विक्सन द्वारा

पापा की अनुपस्थिति में माँ | माँ बेटा सेक्स स्टोरी इनसेस्ट कहानी साल्टी विक्सन द्वारा

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मेरठ की धरती पर अशोक का धम्म-स्तम्भ उठ रहा था। पत्थर की ठंडक और नयी बौद्ध शिक्षा की पवित्रता हवा में तैर रही थी। लेकिन ज़मीन के नीचे, हस्तिनापुर के खंडहरों के पास, मायासुर का पुराना पंथ अभी भी साँस ले रहा था—गीली सुरंगें, दूध और रक्त की गंध, और शरीर की भूख।

देवदत्त लौटा था पाटलिपुत्र से। सफ़ेद चीवर में, माथे पर धम्म का चिन्ह, हृदय में अशोक के नियमों की कठोरता। उसका पिता, स्थानीय महासामन्त, पिछले दो वर्षों से मगध की ओर अभियान पर था—पापा की लंबी अनुपस्थिति। घर में केवल माँ थी—अनिंदिता।

अनिंदिता बयालीस वर्ष की थी। शरीर अभी भी भरा-पूरा, भारी स्तन जो पंथ की रीति के कारण निरंतर दूध से भरे रहते थे। वह मायासुर की अगली महायाजिका बनने वाली थी। और वह अपने जवान बेटे के लिए दीवानी हो चुकी थी।

पहले दिन देवदत्त ने देखा—माँ आँगन में खड़ी थी, साड़ी गीली मिट्टी से सनी, स्तनों का भार कपड़े को खींच रहा था। उनकी नज़रें मिलीं।

“माँ…” देवदत्त का गला सूख गया।

अनिंदिता मुस्कुराई। आवाज़ में खड़ी बोली की तीखी मिठास थी— “आ गया रे मेरे लाल? पापा तो दूर हैं… अब घर में तू ही मर्द है।”

रात हुई। बारिश शुरू हो गई। देवदत्त अपने कक्ष में धम्म का पाठ कर रहा था कि दरवाज़ा धीरे से खुला। अनिंदिता अंदर आई। शरीर पर केवल एक पतला कपड़ा। भारी स्तन दूध से तनकर आगे निकले हुए थे। निपल्स गीले थे।

“बेटा…” उसने दरवाज़ा बंद किया। “पापा नहीं हैं। तू इतना बड़ा हो गया… और मैं इतनी अकेली।”

देवदत्त उठा। “माँ, यह पाप है। अशोक का धम्म—”

अनिंदिता पास आई। उसने उसके मुँह पर अपना एक स्तन दबा दिया—smothering। गर्म, भारी, दूध की मीठी गंध।

“चुप कर। मुँह खोल।”

दूध की धार उसके मुँह में फूट पड़ी। देवदत्त ने बिना सोचे चूस लिया। अनिंदिता की साँस तेज़ हो गई।

“हाँ… ऐसे ही… मेरा दूध पी। तेरे पापा को याद नहीं आता… तू पी ले।”

वह उसे चारपाई पर धकेल कर उसके चेहरे पर बैठ गई—facesitting। गीली चूत उसके मुँह और नाक पर दब गई। अनिंदिता ने कमर घुमाई, धीरे-धीरे नाचते हुए। पंथ का पुराना नृत्य—कमर का लहराना, स्तनों का उछलना, दूध की बूँदें देवदत्त के चेहरे पर गिरती रहीं।

“चाट… जीभ अंदर डाल… माँ की चूत को अपनी माता समझ कर मत देख… समझ कि तू मेरा मर्द है।”

देवदत्त की जीभ निकली। वह चाटने लगा। अनिंदिता की आहों में खड़ी बोली घुली थी— “और जोर से… हाँ बेटा… वहाँ… उसी जगह… पापा कभी इतना अच्छा नहीं चाटते थे।”

उसका huge cock सफ़ेद चीवर के नीचे पत्थर हो चुका था। अनिंदिता ने पीछे हाथ बढ़ाकर उसे बाहर निकाला। मोटा, लंबा, नसों से भरा।

“इतना बड़ा… मेरा बेटा… पापा से भी बड़ा।”

वह मुड़ी और उसके लंड को अपने दोनों हाथों में लेकर दूध से गीला करने लगी—milking। एक हाथ से स्तन दबाती, दूध लंड पर गिराती, दूसरे हाथ से ऊपर-नीचे करती।

“देख मैं कैसे दुह रही हूँ तुझे… जैसे भैंस को दुहते हैं।”

देवदत्त कराह उठा। अनिंदिता ने फिर से उसके चेहरे पर बैठकर facesitting जारी रखा, इस बार और भारी होकर, साँस रोकते हुए। smothering इतना गहरा था कि देवदत्त के हाथ उसके जाँघों पर कस गए। जब वह लगभग बेहोश होने को था, अनिंदिता उठती और फिर बैठ जाती।

फिर वह उस पर सवार हो गई। धीरे-धीरे उसके huge cock को अपनी गीली चूत में उतारने लगी।

“आह्ह… फट रही है… इतना मोटा… बेटा… धीरे… नहीं… पूरा डाल।”

पूरा अंदर चला गया। अनिंदिता ने कमर नचानी शुरू की—पंथ वाला नृत्य अब चूत पर हो रहा था। स्तन उछल-उछल कर देवदत्त के चेहरे पर दूध की बौछार कर रहे थे।

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“माँ… यह गलत है…”

“गलत है तो और जोर से चुन…” अनिंदिता ने उसके होंठों पर दूध लगाकर चूम लिया। “पापा की अनुपस्थिति में माँ को कौन मनाएगा? तू ही तो मेरा परिवार है… family cuckold… सोच, अगर पापा आ जाएँ और देखें कि उनका बेटा उनकी औरत को चोद रहा है…”

उस रात उन्होंने तीन बार किया। अनिंदिता बार-बार उसके चेहरे पर बैठती, दूध पिलाती, लंड दुहती, फिर सवार होकर नाचती। देवदत्त हर बार और गहरा डूबता गया।

अगले दिनों में सब कुछ बदल गया।

दिन में देवदत्त धम्म-स्तम्भ के नीचे खड़ा होकर अशोक के शिलालेख पढ़ता—काम, क्रोध, लोभ का त्याग। रात में माँ उसके कक्ष में आती। कभी सुरंगों में ले जाती। मायासुर की गहराई में पुराने पुजारी और परिवार के कुछ पुरुष (चाचा-ताऊ के रिश्ते वाले) खड़े देख रहे होते। Family cuckold का पूरा खेल। अनिंदिता जानबूझकर देवदत्त को उनके सामने चोदवाती।

“देखो मेरे बेटे का लंड… कितना बड़ा… पापा से भी ताकतवर।”

देवदत्त का चेहरा शर्म से लाल हो जाता, लेकिन लंड और सख्त हो जाता। अनिंदिता उसके मुँह पर बैठकर facesitting करती रहती जबकि पीछे से कोई और उसके स्तनों का दूध पीता। फिर देवदत्त ही उसे चोदता—जोर-जोर से, जैसे सारी शर्म निकालनी हो।

एक रात अनिंदिता ने पूरा अनुष्ठान किया। नग्न नाच—धीमी, साँप जैसी कमर, भारी स्तनों से दूध की धार। देवदत्त को पत्थर की वेदी पर लिटाया। पहले facesitting और smothering से उसका मुँह बंद किया, फिर अपने स्तनों से उसका पूरा लंड दूध से नहलाया, दुहा, चूसा।

“आज तू सिर्फ मेरा है… पापा दूर हैं… धम्म दूर है… केवल माँ और बेटा।”

जब वह अंदर आई तो दोनों रोने लगे—पाप की भारीपन और सुख की तीव्रता एक साथ। अनिंदिता उसके कान में खड़ी बोली में फुसफुसाई—

“मैं दीवानी हो गई हूँ तेरे लंड की… तू भी हो जा मेरी चूत का भूखा… परिवार का यह पाप अब हमारा जीवन है।”

स्तम्भ बनकर तैयार हो गया। अशोक के दूत आने वाले थे।

आखिरी रात अनिंदिता ने देवदत्त को स्तम्भ के ठीक नीचे, अँधेरे में खींचा। बारिश हो रही थी। उसने फिर से उसके चेहरे पर बैठकर साँस रोकी—smothering। दूध और बारिश की बूँदें मिलकर बह रही थीं। फिर उसके huge cock को अपनी चूत में ले लिया और नाचने लगी—खड़ी होकर, कमर मटकाते हुए, स्तनों को उसके मुँह में ठूँसते हुए।

“चोद… माँ को चोद… पापा की जगह ले ले… family का सबसे बड़ा पाप हम दोनों हैं…”

देवदत्त ने कमर उठाई। हर धक्का के साथ वह माँ को और गहरा समर्पित करता गया। अनिंदिता चिल्ला रही थी—खड़ी बोली में गालियाँ और प्यार दोनों।

अंत में जब वह उसके अंदर उंडेल रहा था, अनिंदिता ने उसके बाल पकड़कर अपने स्तनों में दबा लिया और कहा—

“अब तू हमेशा के लिए मेरा मर्द है… पापा लौटें या न लौटें… यह शरीर, यह दूध, यह चूत… सब तेरे लिए।”

स्तम्भ पर अशोक के धम्म के शब्द चमक रहे थे। नीचे, माँ और बेटा एक-दूसरे में गुथे पड़े थे—obsessed, damned, और एक-दूसरे के बिना अधूरे।

Tip Salty Vixen