गरम देसी मम्मी बेटा चुदाई फुल इंसेस्ट कहानी द्वारा साल्टी विक्सन

गरम देसी मम्मी बेटा चुदाई: फुल इंसेस्ट कहानी द्वारा साल्टी विक्सन

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वेदिका शर्मा 48 साल की थीं। शरीर अभी भी ऐसा था कि साड़ी के अंदर से भी पुरुषों की निगाहें रुक जातीं। भारी, गोल स्तन जो ब्लाउज के बटन दबाए रखते, पतली कमर, और जांघें जो चलते समय धीरे-धीरे रगड़ खातीं। उनके पति राजेश 52 के हो चुके थे — व्यस्त, थके हुए, और बेडरूम में लगभग निष्क्रिय। बेटा आरव 30 का था। लंबा, मजबूत कंधे, गहरी आवाज़। पिछले दो साल से माँ-बेटे के बीच एक चुपचाप लेकिन गाढ़ी गर्मी बढ़ रही थी।

यह गर्मी अचानक नहीं आई थी। आरव जब कॉलेज से लौटा था, तब से वेदिका की निगाहें उसके शरीर पर ठहरने लगी थीं। कभी वह नहाकर तौलिया Reme लपेटे रसोई में आता, पानी की बूँदें छाती से लुढ़कतीं, और वेदिका की साँस अटक जाती। कभी वह माँ की साड़ी का पल्लू ठीक करते समय उंगलियाँ जानबूझकर उनकी कमर पर फेरता। दोनों जानते थे। दोनों चुप रहते।

एक शुक्रवार की शाम राजेश को पुणे से बाहर तीन दिन की मीटिंग पर जाना पड़ा। हिनजवाड़ी के एक क्लाइंट के साथ। घर में सिर्फ माँ और बेटा रह गए।

शाम के सात बज रहे थे। वेदिका रसोई में खड़ी थीं। लाल रंग की साड़ी, काला ब्लाउज। बाल खुले थे। आरव पीछे से आया। बिना कुछ बोले उसकी कमर में दोनों हाथ डाल दिए। वेदिका का शरीर तन गया, लेकिन हटाने की कोई कोशिश नहीं की।

“माँ…” आरव की आवाज़ धीमी थी। “आज रात कोई नहीं है।”

वेदिका ने आँच बंद की। मुड़ी। आँखों में डर था, लेकिन उसके नीचे कुछ और भी था — भूख। “आरव… यह… यह नहीं होना चाहिए।”

“मैं जानता हूँ,” उसने जवाब दिया। “लेकिन तुम भी उतनी ही गीली हो जितना मैं सख्त हूँ। पिछले छह महीनों से हर रात मैं सोचता हूँ। तुम भी सोचती हो।”

वेदिका की साँस तेज़ हो गई। उसने धीरे से सिर हिलाया। “हाँ… सोचती हूँ।”

आरव ने उसे दीवार से सटाया। पहले धीरे चूमा, फिर जोर से। जीभ अंदर घुस गई। वेदिका के हाथ उसके बालों में घुस गए। साड़ी का पल्लू फिसल गया। आरव ने ब्लाउज के हुक खोले। भारी स्तन बाहर आ गए। उसने एक निप्पल मुँह में लिया और दाँत से हल्का काटा। वेदिका की कमर उठ गई।

“इतने सालों से इनको छुपा के रखा,” आरव ने कहा, “आज मैं इनको चाटूंगा जितना चाहूँ।”

वह घुटनों के बल बैठ गया। साड़ी और पेटीकोट ऊपर किए। गीली सफेद पैंटी दिखाई दी। आरव ने नाक से सुँघा, फिर जीभ से ऊपर से नीचे तक चाटा। वेदिका की टाँगें काँपने लगीं। उसने उसके सिर को अपनी जांघों के बीच दबा लिया।

“और अंदर… जीभ अंदर डाल,” वेदिका ने फुसफुसाया।

आरव ने पैंटी एक तरफ की और जीभ घुसा दी। गहराई तक। क्लिट पर गोलाई बनाते हुए चूसने लगा। वेदिका का एक हाथ सिंक पकड़े था, दूसरा उसके बाल। पानी टपकने लगा। वह काँपते हुए पानी छोड़ गई — पहली बार बेटे की जीभ पर।

थोड़ी देर बाद वेदिका खुद खड़ी हुई। आरव को डाइनिंग चेयर पर बैठाया। साड़ी कमर तक उठा ली और उसके मुँह पर बैठ गई। पूरा वजन। “अब चाट… माँ की चूत को अच्छी तरह चाट।”

आरव दोनों हाथों से उसकी गांड पकड़कर जोर-जोर से चाटने लगा। वेदिका आगे-पीछे हिप्स हिला रही थी, उसके नाक और मुँह पर रगड़ रही थी। आरव का चेहरा पूरी तरह गीला हो गया। वेदिका दूसरी बार काँप गई। पानी उसके मुँह में भर गया।

फिर वह नीचे उतरी। आरव की जींस खोली। मोटा, नसों वाला लंड बाहर निकला — आठ इंच से ज्यादा। वेदिका ने दोनों हाथों से पकड़ा। धीरे-धीरे हिलाने लगी। थूक लगाकर फिसलन बढ़ाई। फिर मुँह में लिया। पहले सिर्फ टोपी, फिर आधा, फिर गला तक। आँखों में पानी आ गया फिर भी नहीं छोड़ी। गहरी, गीली blowjob। गल-गल की आवाज़ आ रही थी। आरव के हाथ उसके बालों में थे। वह सिर हिला-हिलाकर चूस रही थी।

“माँ… मैं छोड़ने वाला हूँ…”

वेदिका ने लंड निकाला और चेहरे पर ले लिया। गर्म गाढ़ा वीर्य उसके माथे, गालों, होंठों और खुले स्तनों पर गिरने लगा। उसने मुस्कुराते हुए उंगलियों से चाट लिया और बाकी मुँह में डाल लिया।

रात भर वे दोनों माँ के बेडरूम में रहे। आरव ने उसे चारपाई पर लिटाया। टाँगें कंधों पर रखीं। धीरे-धीरे अंदर घुसा। वेदिका की आँखें बंद थीं, मुँह खुला। “धीरे… बहुत बड़ा है…” लेकिन जब पूरा अंदर गया तो उसने खुद पैर और फैला दिए। आरव ने पहले धीरे चलाना शुरू किया, फिर जोर से। बिस्तर चरमरा रहा था। वेदिका के नाखून उसकी पीठ पर लग रहे थे। “और जोर से… माँ की चूत फाड़ दे बेटा…”

तीन बार वह पानी छोड़ चुकी थी जब आरव ने अंदर ही छोड़ दिया। गर्म वीर्य भर गया। दोनों पसीने से लथपथ लेटे रहे।

अगली सुबह वेदिका नाश्ता बना रही थीं। साड़ी ठीक से नहीं पहनी थी। ब्लाउज के बटन खुले थे। आरव पीछे से आया और बिना पूछे स्तनों को दोनों हाथों में ले लिया। “आज फिर?”

“हाँ,” वेदिका ने बस इतना कहा।

उस दिन वे तीन बार और जुड़े। एक बार किचन काउंटर पर, एक बार बालकनी में पर्दे के पीछे, और रात को फिर बिस्तर पर। हर बार वेदिका खुद पहल करतीं। कभी वह आरव के ऊपर बैठतीं और खुद उछल-उछलकर पानी छोड़तीं। कभी वह उसके मुँह पर बैठ जातीं जब तक कि आरव की जीभ थक न जाए।

राजेश तीसरे दिन लौटे। वेदिका ने जानबूझकर बाथरूम का दरवाजा आधा खुला छोड़ दिया। आरव अंदर था। माँ झुकी हुई थीं, दोनों हाथ दीवार पर। आरव पीछे से जोर-जोर से धक्का मार रहा था। पानी की आवाज़ के साथ चट-चट की आवाज़ आ रही थी। राजेश दरवाजे पर खड़े रह गए। वेदिका ने आईने में पति की आँखें देखीं। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “देखते रहो। अब यह रोज होगा।”

राजेश कुछ नहीं बोले। चेहरे पर हार और उत्तेजना दोनों थीं।

उस रात से घर का नियम बदल गया। राजेश सोफे पर बैठे रहते। वेदिका और आरव बेडरूम में जाते। कभी दरवाजा खुला रहता। कभी वेदिका पति के सामने ही बेटे का लंड चूसतीं। कभी आरव माँ को लिविंग रूम के कालीन पर लिटाकर चाटता जबकि राजेश कुर्सी पर बैठे देखते।

एक शाम वेदिका ने पति को बुलाया। “आज तुम भी पास बैठो।”

आरव बिस्तर पर लेटा था। वेदिका उसके ऊपर बैठ गईं — चेहरा उसकी चूत पर, मुँह लंड पर। फेस-सिटिंग के साथ 69। राजेश पास में कुर्सी खींचकर बैठ गए। वेदिका कभी-कभी मुँह से लंड निकालकर पति की तरफ देखतीं और फिर से गहरे में ले जातीं। आरव नीचे से जोर-जोर से चाट रहा था। वेदिका काँप-काँपकर पानी छोड़ रही थीं।

बाद में आरव ने माँ को कुत्ते की पोजीशन में किया। राजेश के बिल्कुल सामने। हर धक्के के साथ वेदिका की स्तन झूल रहे थे। वह जोर-जोर से कराह रही थीं, “हाँ बेटा… और अंदर… माँ की चूत तेरी है…”

राजेश ने अपना लंड निकाला और हिलाने लगे। वेदिका ने देखकर मुस्कुराया। “हिलाओ… देखो कैसे तुम्हारा बेटा तुम्हारी बीवी को चोद रहा है।”

कई हफ्ते ऐसे बीत गए। घर का माहौल बदल चुका था। वेदिका अब दिन में भी साड़ी के अंदर पैंटी नहीं पहनतीं। आरव जब चाहे तब हाथ डाल देता। कभी वह ऑफिस से जल्दी लौटता और माँ को किचन में चोदता। कभी रात को तीनों एक ही बिस्तर पर सोते — आरव माँ के अंदर, राजेश पास में।

फिर गणेशोत्सव आ गया। पुणे की गलियाँ दोल-ताशा से गूँज रही थीं। भीड़ बहुत थी। वेदिका लाल साड़ी में थीं। आरव ने उन्हें पुरानी शहर की एक संकरी गली में, ऐतिहासिक मंदिर के पीछे खींच लिया। भीड़ की आवाज़ आसपास गूँज रही थी। आरव ने साड़ी का पल्लू उठाया और उंगलियाँ अंदर डाल दीं। वेदिका दीवार से सट गईं। “यहाँ… लोग देख लेंगे…”

“देख लें,” आरव ने कहा और लंड निकालकर पीछे से घुसा दिया। भीड़ की आवाज़ में उनकी कराहें दब गईं। आरव जोर-जोर से धक्का मार रहा था। वेदिका के स्तन साड़ी के अंदर से बाहर आने को थे। ठीक उसी समय परिवार के एक रिश्तेदार ने मोड़ पर आकर देख लिया। वेदिका की आँखें मिलीं। उसने सिर नहीं झुकाया। आरव का हाथ पकड़ लिया और धक्के जारी रखे जब तक कि दोनों पानी नहीं छोड़ गए।

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रात को घर पहुँचकर वेदिका ने साड़ी फेंक दी। नंगी खड़ी हो गईं। राजेश और आरव दोनों के सामने। “अब कोई छिपाना नहीं। यह मेरी मर्जी है।”

उस रात आरव ने माँ को चार अलग-अलग पोजीशन में चोदा। राजेश ने सिर्फ देखा और खुद को हिलाया। आखिर में वेदिका ने बेटे का लंड चूसते-चूसते उसके वीर्य को मुँह में लिया और पति को दिखाया।

इसके बाद जीवन सामान्य हो गया — नए अर्थों में। सुबह आरव नाश्ते से पहले माँ की चूत चाटता। दोपहर को कभी-कभी ऑफिस से आकर उन्हें सोफे पर चोदता। रात को राजेश के सामने या बिना उनके। कभी वेदिका खुद पहल करतीं — बेटे के कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लेतीं और सुबह तक नहीं निकलतीं।

एक रात वेदिका ने आरव से कहा, “मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे गर्भवती कर दो।”

आरव मुस्कुराया। “माँ… तुम 48 की हो।”

“फिर भी,” उसने कहा। “मैं चाहती हूँ कि तुम्हारा बच्चा मेरे अंदर हो।”

उस रात आरव ने बिना निकाले कई बार अंदर छोड़ा। वेदिका हर बार टाँगें ऊपर उठाए पड़ी रहीं ताकि वीर्य अंदर रहे।

महिनों बाद घर का माहौल और गहरा हो गया। वेदिका अब खुलकर बेटे को छूतीं, चूमतीं, चोदतीं। राजेश ककल्ड की भूमिका में पूरी तरह आ चुके थे। कभी-कभी वेदिका पति को नीचे लिटातीं और उनके मुँह पर बैठकर आरव से चुदवतीं। आरव का लंड माँ की चूत में जाता और राजेश सिर्फ चाटते रहते।

एक शाम कोरगाँव पार्क के एक प्राइवेट लाउंज में वेदिका और आरव मिले। वेदिका ने पारंपरिक साड़ी पहनी थी लेकिन अंदर कुछ नहीं। आरव ने टेबल के नीचे हाथ डालकर उंगलियाँ घुसा दीं। वेदिका मुस्कुराती रहीं और कॉफी पीती रहीं। बाद में कार में पीछे की सीट पर उसने बेटे का लंड निकाला और भीड़ भरी सड़क के बीच चूसा। आरव ने उसके बाल पकड़कर गले तक धकेल दिया।

घर लौटकर उन्होंने राजेश को बताया। राजेश ने सिर झुका लिया। वेदिका ने उसके गाल सहलाए। “तुम सिर्फ देखते रहो। तुम्हारी बीवी अब तुम्हारे बेटे की है।”

रातें लंबी होती गईं। कभी आरव माँ को बाथरूम में दीवार से सटाकर चोदता। कभी वेदिका सुबह जल्दी उठकर बेटे के लंड को मुँह में लेकर जगातीं। कभी तीनों लिविंग रूम में होते — वेदिका आरव के ऊपर, राजेश पीछे से माँ की गांड सहलाते हुए।

एक दिन वेदिका ने साफ कह दिया, “मैं अब तुम्हारी पत्नी सिर्फ कागजों पर हूँ। असल में मैं अपने बेटे की औरत हूँ।”

राजेश ने स्वीकार कर लिया।

अब घर में कोई झिझक नहीं रही। सुबह से रात तक माँ और बेटा जब चाहें एक-दूसरे को लेते। कभी धीरे-धीरे प्यार से, कभी जानवरों की तरह। वेदिका की चूत हमेशा थोड़ी खुली और गीली रहती। आरव का लंड हमेशा तैयार। और राजेश — हमेशा देखते हुए, कभी-कभी खुद को हिलाते हुए, पूरी तरह ककल्ड।

गणेशोत्सव के बाद वाले महीने में एक रात वेदिका ने दोनों को बुलाया। नंगी लेट गईं। “आज दोनों। लेकिन अंदर सिर्फ आरव जाएगा।”

आरव ने पहले माँ की चूत चाटी, फिर लंड घुसाया। राजेश ने स्तन चूसे। वेदिका दोनों के बीच में थीं — एक तरफ बेटा चोद रहा था, दूसरी तरफ पति के मुँह में स्तन। वह बार-बार पानी छोड़ती रहीं। आखिर में आरव ने गहराई में छोड़ दिया। वेदिका ने टाँगें फैलाए रखीं। राजेश को देखने दिया कि बेटे का वीर्य उनकी बीवी की चूत से निकल रहा है।

“चाट,” वेदिका ने पति से कहा।

राजेश ने झुककर चाट लिया।

उस रात के बाद कुछ भी छिपा नहीं रहा। वेदिका खुलेआम बेटे के साथ सोतीं। घर में कोई नौकर नहीं था। सिर्फ तीन लोग और एक नया, अजीब लेकिन सहमति वाला रिश्ता।

आरव कभी-कभी माँ को ऑफिस भी ले जाता। हिनजवाड़ी की ऊँची बिल्डिंग में, लंच ब्रेक में दरवाजा लॉक करके वेदिका की साड़ी उठा देता। वह टेबल पर बैठ जातीं और बेटा बीच में खड़ा होकर चोदता। खिड़की से पुणे का नजारा दिखता। वेदिका कराहतीं लेकिन आवाज़ दबातीं।

एक बार कोरगाँव पार्क के होटल में उन्होंने पूरा दिन निकाला। कमरे में घुसते ही वेदिका ने साड़ी फेंक दी। आरव ने उसे खिड़की से सटाया। नीचे लोग चल रहे थे। उसने पीछे से घुसाया और धीरे-धीरे चलाना शुरू किया। वेदिका का माथा शीशे पर था। “लोग देख सकते हैं…”

“देख लें,” आरव ने फिर वही कहा।

बाद में बिस्तर पर वेदिका ने बेटे के मुँह पर बैठकर पानी छोड़ा। फिर खुद नीचे जाकर लंबा blowjob दिया। गला तक लिया, आँखों में आँसू आ गए, फिर भी जारी रखा। आरव ने बाल पकड़कर जोर से धकेले। आखिर में मुँह में ही छोड़ दिया। वेदिका ने निगल लिया और मुस्कुराई।

रात को घर लौटकर उन्होंने राजेश को सारी डिटेल बताई। राजेश ने फिर से खुद को हिलाया।

समय के साथ वेदिका का शरीर और भी संवेदनशील हो गया। आरव का एक स्पर्श काफी होता। कभी वह सुबह चाय बनाते समय अचानक बेटे के सामने झुक जातीं और खुद साड़ी उठा लेतीं। आरव समझ जाता। बिना एक शब्द के पीछे से घुस जाता।

एक लंबी छुट्टी में तीनों घर पर थे। वेदिका ने तय किया कि आज पूरा दिन नंगे रहेंगे। सुबह से ही वह नंगी घूम रही थीं। आरव भी। राजेश कपड़े में थे लेकिन देखते रहते। दोपहर को वेदिका ने आरव को सोफे पर लिटाया और ऊपर बैठ गईं। धीरे-धीरे लंड अंदर लिया। फिर उछलने लगीं। स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे। राजेश सामने कुर्सी पर थे। वेदिका कभी-कभी उनकी तरफ देखकर मुस्कुरातीं। “देख रहे हो ना कैसे तुम्हारा बेटा तुम्हारी बीवी की चूत को फाड़ रहा है?”

आरव ने कमर पकड़कर और जोर लगाया। वेदिका चिल्लाईं और पानी छोड़ दीं। फिर भी उछलती रहीं जब तक आरव अंदर नहीं छोड़ दिया।

शाम को बाथरूम में आरव ने माँ को दीवार से सटाया। एक टाँग उठाई और खड़े-खड़े चोदा। पानी की बौछार गिर रही थी। दोनों के शरीर पर साबुन। वेदिका की पीठ दीवार से रगड़ खा रही थी। आखिर में दोनों एक साथ पानी छोड़ गए।

रात को बिस्तर पर वेदिका ने कहा, “मैं खुश हूँ। पहली बार सच में खुश हूँ।”

आरव ने उसके माथे पर चुंबन लिया। “मैं भी माँ।”

राजेश अंधेरे में लेटे हुए सुन रहे थे। उन्होंने कुछ नहीं कहा। बस स्वीकार कर लिया।

कहानी यहीं नहीं थमी। आने वाले महीनों में और कई रातें आईं। कभी धीमी और प्यार भरी, कभी गंदी और जोरदार। कभी सिर्फ माँ-बेटा, कभी तीनों। वेदिका कभी बेटे के लंड को घंटों चूसतीं। कभी उसके मुँह पर बैठकर बार-बार पानी छोड़तीं। कभी कुत्ते की पोजीशन में गांड हिला-हिलाकर मँगवातीं। आरव हर बार देता।

और हर बार सहमति साफ होती। उम्र का फासला था, रिश्ता वर्जित था, लेकिन इच्छा दोनों तरफ बराबर थी।

वेदिका अब साड़ी में भी बेटे की औरत लगतीं। आरव की निगाहें जब उन पर पड़तीं तो शरीर खुद तैयार हो जाता। राजेश देखते रहते — कभी उत्तेजित, कभी शर्मिंदा, लेकिन हमेशा वहीं।

एक रात वेदिका ने दोनों के बीच में लेटकर कहा, “यह हमारा घर है। हमारे नियम हैं। और मैं अपनी मर्जी से अपने बेटे की हूँ।”

आरव ने जवाब में सिर्फ उसे कसकर पकड़ा और अंदर तक धकेल दिया।

बाकी रात फिर वही आवाज़ें — चट-चट, कराहें, गीली आवाज़ें — और एक नई, अजीब लेकिन पूरी तरह सहमति वाली जिंदगी।

Tip Salty Vixen