अकोला की रानी… बेटे की गुलाम | माँ बेटा सेक्स इंसेस्ट कहानी | Mom Son Sex Story

अकोला की रानी… बेटे की गुलाम | माँ बेटा सेक्स इंसेस्ट कहानी | Mom Son Sex Story

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अकोला की धूल भरी सड़कों पर सूरज ढल चुका था। मूर्ना नदी के किनारे बसे इस “कॉटन सिटी” में राठौर परिवार का बंगला सबसे बड़ा और सबसे शानदार था। तीन मंजिला हवेली, चारों तरफ ऊँची दीवारें, अंदर लॉन, स्विमिंग पूल और नौकर-चाकरों की फौज। पिताजी स्वर्गीय राजेश राठौर कॉटन ट्रेड के बड़े नाम थे। उनकी मौत के बाद पूरा साम्राज्य उनकी पत्नी सीमा राठौर और इकलौते बेटे आरव के हाथ में आ गया था।

सीमा राठौर… चालीस की उम्र में भी देखने वाली महिला। गोरी, गदराई हुई देह, भारी स्तन जो साड़ी के पल्लू के नीचे भी अपनी मौजूदगी जताते थे, पतली कमर और चौड़े कूल्हे। विधवा होने के बावजूद उसने कभी काला नहीं पहना। हमेशा रेशमी साड़ियाँ, सोने के गहने और हल्की खुशबू। शहर में लोग उसे “अकोला की रानी” कहते थे।

आरव बाईस साल का था। लंबा, तगड़ा, कॉलेज में पढ़ाई के नाम पर सिर्फ पार्टियाँ और लड़कियाँ। पिता की मौत के बाद वह घर का मालिक बन बैठा था। माँ उसके हर हुक्म को मानती थी… पर आज तक वह सिर्फ बेटा था।

आज आरव की बैचलर पार्टी थी। दोस्तों ने पुणे से आकर अकोला के सबसे महंगे रिसॉर्ट में पार्टी रखी थी। लेकिन आरव ने कहा—

“पार्टी तो घर पर ही होगी। मम्मी को भी बुलाऊँगा।”

दोस्त हँसे। “अरे यार, मम्मी के सामने कैसे मजे लेंगे?”

आरव की आँखों में एक अजीब चमक थी। “तुम लोग आराम से मस्त रहो। मैं मम्मी को संभाल लूँगा।”

रात के नौ बजे हवेली के बगीचे में पार्टी शुरू हो गई। शराब, लाइट्स, संगीत। आरव के दोस्त नशे में धुत थे। सीमा साड़ी पहनकर आई थी—लाल रेशमी साड़ी, गले में भारी सोने की चैन, कानों में झुमके। उसने सोचा बेटे की पार्टी है, थोड़ी देर बैठकर चली जाऊँगी।

आरव ने माँ को पास बुलाया। “मम्मी, आज तुम मेरी खास गेस्ट हो। बैठो।”

सीमा मुस्कुराई। “बेटा, तुम्हारे दोस्त हैं… मैं अंदर चली जाती हूँ।”

आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया। “नहीं। आज तुम यहीं रहोगी। मेरे पास।”

शुरुआत हल्की थी। आरव ने माँ को व्हिस्की का गिलास पकड़ाया। सीमा ने मना किया, लेकिन बेटे के जोर देने पर एक घूँट पी ली। फिर एक और। फिर एक और।

दोस्तों ने मजाक उड़ाया। “आरव भाई, तुम्हारी मम्मी तो बहुत हॉट लग रही है यार!”

आरव हँसा। “बोलो मम्मी… कैसा लग रहा है?”

सीमा शरमा गई। “बेटा… ये क्या बातें कर रहे हो…”

आरव ने अचानक माँ की कमर में हाथ डाल दिया। साड़ी के ऊपर से। सीमा सहम गई। “आरव!”

“शांत रहो मम्मी। आज मेरी पार्टी है। तुम मेरी हो।”

दोस्तों की आँखें फटी की फटी रह गईं। कोई कुछ बोल नहीं पाया। आरव ने माँ को खींचकर अपने पास बैठा लिया। एक हाथ कमर पर, दूसरा जाँघ पर।

सीमा फुसफुसाई, “बेटा… लोग देख रहे हैं… छोड़ो…”

“देखने दो। आज से तुम मेरी गुलाम हो।”

शब्द सुनकर सीमा का दिल धक से रह गया। लेकिन शराब और बेटे के मजबूत हाथों ने उसकी हिम्मत तोड़ दी। आरव ने धीरे-धीरे साड़ी का पल्लू सरकाया। भारी स्तन बाहर आने लगे। ब्लाउज टाइट था। निप्पल्स कड़े हो चुके थे।

आरव ने दोस्तों की तरफ देखा। “देखो… मेरी मम्मी के टिट्स। कितने बड़े हैं।”

सीमा ने आँखें बंद कर लीं। शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया था। आरव ने ब्लाउज के ऊपर से स्तन दबाए। “बोलो मम्मी… ये किसके हैं?”

“ब… बेटे के…” सीमा की आवाज काँप रही थी।

“जोर से बोलो।”

“बेटे के… आरव के…”

दोस्तों ने तालियाँ बजाईं। किसी ने कहा, “भाभी जी… मतलब मम्मी जी… आज तो मजा आ गया!”

आरव ने माँ को खड़ा किया। बगीचे के बीचों-बीच। “साड़ी खोलो।”

सीमा काँप रही थी। “बेटा… मत करो… मैं तुम्हारी माँ हूँ…”

“आज से तुम माँ नहीं, मेरी रंडी हो। खोलो।”

आँसू आँखों में आ गए, लेकिन उसने साड़ी खोल दी। लाल साड़ी नीचे गिर गई। सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट। आरव ने ब्लाउज के हुक खोले। भारी, गदराए स्तन बाहर झूलने लगे। गोरे-गोरे, गुलाबी निप्पल्स।

आरव ने दोनों स्तनों को हाथ में लिया और जोर से दबाया। “कम ऑन टिट्स… आज रात भर।”

उसने माँ को घुटनों के बल बैठाया। खुद खड़ा रहा। पैंट का जिप खोला। कठोर लंड बाहर निकला। सीमा की आँखें फटी रह गईं। बेटे का लंड इतना मोटा और लंबा… उसने कभी सोचा भी नहीं था।

“चूसो।”

सीमा ने सिर हिलाया। “नहीं… मैं नहीं कर सकती…”

आरव ने उसके बाल पकड़कर मुँह के पास ले गया। “चूसो वरना सबके सामने तुम्हारी इज्जत मिट्टी में मिला दूँगा।”

माँ ने काँपते हुए होंठ खोले। बेटे का गरम लंड मुँह में चला गया। आरव ने जोर से धक्का दिया। गला भर गया। सीमा ने आँखें बंद कर लीं और चूसने लगी।

दोस्त चारों तरफ खड़े होकर देख रहे थे। कोई वीडियो बना रहा था। आरव हँस रहा था। “देखो… अकोला की रानी मेरे लंड को चाट रही है।”

थोड़ी देर बाद आरव ने लंड निकाला। सीमा का मुँह लार से तर था। आरव ने माँ को लेटा दिया। घास पर। पेटीकोट ऊपर सरकाया। चूत बालों से ढकी हुई थी, लेकिन गीली चमक रही थी।

“मम्मी… तुम गीली हो। बेटे के लिए?”

सीमा रो रही थी। “छोड़ो बेटा… पाप लगेगा…”

आरव ने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। “पाप तो पहले ही लग चुका। अब मजा लो।”

उसने लंड चूत पर रख दिया और एक झटके में अंदर घुसा दिया। सीमा चिल्लाई। “आाहhh… दर्द… बेटा… धीरे…”

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आरव ने कोई दया नहीं दिखाई। जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। आरव ने दोनों स्तनों को पकड़ रखा था।

“बोलो… तुम किसकी रंडी हो?”

“आर… आरव की…”

“जोर से!”

“आरव की रंडी… बेटे की गुलाम…”

दोस्तों ने और तालियाँ बजाईं। किसी ने शराब के छींटे स्तनों पर डाल दिए। आरव ने गति बढ़ा दी। चूत की आवाज चारों तरफ गूँज रही थी—थप-थप-थप।

थोड़ी देर बाद आरव बाहर निकला। लंड चमक रहा था। उसने माँ के स्तनों के बीच लंड रख दिया। “टिटजॉब दो।”

सीमा ने दोनों स्तनों से लंड को दबाया। आरव ने धक्के लगाए। फिर अचानक जोर से साँस ली और झड़ गया। गाढ़ा, गरम वीर्य स्तनों पर, निप्पल्स पर, गले तक छलक आया।

“अह्ह्ह… मम्मी के टिट्स पर… कितना मजा आया…”

सीमा लेटी हुई थी। आँसू बह रहे थे। स्तन वीर्य से सने हुए। आरव ने उंगली से वीर्य लिया और माँ के मुँह में डाल दिया। “चाटो। अपना बेटा का Cum।”

सीमा ने निगल लिया।

पार्टी यहीं खत्म नहीं हुई। आरव ने माँ को उठाया और अंदर बेडरूम में ले गया। दोस्त भी पीछे-पीछे आए। आरव ने दरवाजा बंद नहीं किया।

रात भर आरव ने माँ को हर पोजीशन में लिया। डॉगी स्टाइल में पीठ पर चढ़कर, मिशनरी में स्तन दबा-दबाकर, फिर माँ को ऊपर बिठाकर। हर बार झड़ने से पहले स्तनों पर या मुँह में Cum करता।

सुबह चार बजे जब सब शांत हुए तो सीमा बिस्तर पर नंगी लेटी थी। शरीर पर नीले निशान, स्तनों पर सूखा हुआ वीर्य, चूत सूजी हुई। आरव उसके बगल में लेटा था। हाथ स्तन पर रखे हुए।

“मम्मी…” उसने धीरे से कहा, “आज से तुम मेरी हो। घर की रानी नहीं… मेरे बेडरूम की गुलाम। जब चाहूँगा चूसूँगा, जब चाहूँगा चोदूँगा। समझी?”

सीमा ने आँखें खोलीं। आँसू अभी भी थे, लेकिन आवाज में हार थी। “हाँ… बेटा… तुम्हारी गुलाम…”

अगले दिन से हवेली का माहौल बदल गया। नौकरों को पता चल गया था। लेकिन कोई मुँह नहीं खोलता था। आरव अब खुलकर माँ के साथ रहता। सुबह नाश्ते में माँ को नंगी बैठाता, स्तनों पर जैम लगाकर चाटता। दोपहर में ऑफिस से आकर माँ को टेबल पर लिटाकर चोदता। रात को बेडरूम में घंटों।

एक हफ्ते बाद आरव ने माँ के लिए खास कपड़े मँगवाए। सिर्फ छोटे स्कर्ट, टॉप जो स्तन आधे बाहर रखते, और कभी-कभी सिर्फ एप्रन। घर में घूमते समय माँ को नंगा रखता।

एक दिन आरव के दोस्त फिर आए। आरव ने माँ को बुलया। सीमा आई—नंगी। सिर्फ गले में कुत्ते वाला कॉलर। आरव ने चेन पकड़ी हुई थी।

“आज तुम सबके सामने सेवा करोगी।”

सीमा घुटनों के बल बैठ गई। एक-एक करके सबके लंड चूसे। फिर आरव ने उसे चारपाई पर लिटाया और सबके सामने चोदा। आखिर में सबने बारी-बारी स्तनों पर Cum किया। सीमा के स्तन सफेद-सफेद वीर्य से लथपथ हो गए।

आरव ने फोन निकाला और वीडियो बनाया। “ये देखो… अकोला की सबसे अमीर औरत… मेरे Cum से नहाई हुई।”

सीमा अब पूरी तरह टूट चुकी थी। दिन भर बेटे की सेवा करती। कभी लंड चूसती, कभी स्तनों से टिटजॉब देती, कभी कुतिया बनकर रेंगती। आरव उसे “रंडी मम्मी”, “मेरी व्यक्तिगत वेश्या”, “Cum डंप” कहकर बुलाता।

एक रात आरव ने माँ से कहा, “मैं शादी करूँगा। लेकिन तुम मेरी रखैल रहोगी। मेरी बीवी के सामने भी तुम मेरी सेवा करोगी। समझी?”

सीमा ने सिर झुका लिया। “जैसी आपकी मर्जी बेटा…”

आरव ने माँ को खींचकर अपने ऊपर बैठाया। लंड चूत में धंस गया। स्तन उसके मुँह में। वह काट-काट कर चूस रहा था।

“बोलो… तुम हमेशा के लिए मेरी गुलाम हो।”

“हाँ… हमेशा… बेटे की गुलाम… आरव की रंडी…”

आरव जोर से झड़ा। इस बार अंदर। फिर निकाला और बाकी Cum स्तनों पर डाल दिया।

सीमा लेटी रही। बेटे का वीर्य उसके शरीर पर, अंदर, स्तनों पर। आँखें बंद थीं। अकोला की रानी अब सिर्फ एक चीज रह गई थी—

बेटे की व्यक्तिगत सेक्स स्लेव।

और यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। महीने बीतते गए। आरव ने माँ को और गिराया। कभी पार्टी में दोस्तों के साथ शेयर किया, कभी अकेले घंटों चोदा, कभी सिर्फ स्तनों पर Cum करके छोड़ दिया।

सीमा अब खुद मांगने लगी थी। “बेटा… आज स्तनों पर डालो… मम्मी के टिट्स पर अपना गर्म Cum…”

आरव हँसता। “लो मम्मी… लो अपनी खुराक।”

और हर बार स्तन सफेद हो जाते।

अकोला की धूल भरी हवाओं में राठौर हवेली अब सिर्फ एक बात के लिए जानी जाती थी—

वहाँ एक बेटा रहता है… और उसकी माँ उसकी सबसे वफादार, सबसे गिरी हुई, सबसे हॉट गुलाम।

Tip Salty Vixen