जब मम्मी घर से निकलीं तो माधव को फिर वही भ्रम हुआ। रात का अंधेरा था। कामिनी अपने कमरे में अधनंगी सोई थी। पतली साड़ी पेट तक खिसक चुकी थी। दोनों स्तन बाहर निकले हुए थे। गुलाबी निप्पल तने हुए थे।
माधव बिस्तर के पास आए। उन्होंने सोचा पत्नी है। हाथ बढ़ाकर एक निप्पल पकड़ा और मुँह में ले लिया। जीभ से गोल-गोल चाटा। दाँत से हल्का काटा। दूसरा निप्पल भी चूसा। लार से दोनों चुचियाँ चमकने लगीं। कामिनी की साँस तेज हुई लेकिन वह पूरी तरह नहीं जागी।
माधव का लंड पहले से तना हुआ था। उन्होंने पजामा नीचे किया। मोटा, काला, नसों वाला लंड बाहर निकला। उन्होंने कामिनी की टाँगें फैलाईं। उसकी चुत पहले से गीली थी। दो उंगलियाँ अंदर घुसा दीं। चुत की दीवारों को फैलाते हुए अंदर-बाहर किया। कामिनी कराह उठी। “आह्ह…”
माधव ने उंगलियाँ निकालीं और अपने लंड पर गीलापन मल लिया। फिर कामिनी को पेट के बल पलटा। उसकी गांड के दोनों गोल हिस्सों को फैलाया। मध्य में गुलाबी छेद दिख रहा था। उन्होंने थूक लगाया और अपना मोटा लंड गांड में धकेल दिया। एक ही झटके में आधा अंदर चला गया।
कामिनी की आँखें खुल गईं। दर्द और सुख दोनों एक साथ। “पापा… यह क्या… अह्हह्ह…”
माधव रुक नहीं सके। लंड और अंदर गया। गांड की दीवारें लंड को कस रही थीं। उन्होंने कमर झटके से आगे की। पूरा लंड अंदर समा गया। अंडकोष कामिनी की गीली चुत से टकराने लगे।
“रंडी… आज तो गांड भी खोल दी तूने,” माधव ने कहा और जोर-जोर से धक्के मारने लगे। हर धक्के के साथ कामिनी की गांड लाल होने लगी। माधव ने एक हाथ से उसकी गांड पर थप्पड़ मारा। छप्पड़ की आवाज आई। फिर दूसरा थप्पड़। कामिनी और जोर से कराहने लगी।
थप्पड़ मार चुदाई जारी रही। माधव ने कामिनी के बाल पकड़कर उसका सिर पीछे खींचा। “देख पापा का मोटा लंड कैसे तेरी गांड फाड़ रहा है।” उन्होंने लंड लगभग पूरा निकाला और फिर जोर से अंदर घुसेड़ दिया। कामिनी की आवाज दब गई।
थोड़ी देर बाद माधव ने लंड निकाला। गांड का छेद खुला रह गया था। उन्होंने कामिनी को पीठ के बल लिटाया। उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रखीं। अब चुत के सामने लंड था। गीली, गुलाबी, फैली हुई चुत। माधव ने लंड का सिरा उसके छेद पर रखा और एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया।
कामिनी चीख पड़ी। “पापा… पूरा अंदर है… मेरी चुत फट जाएगी…”
माधव नहीं रुके। गर्भवती बनाने वाली चुदाई शुरू कर दी। हर धक्के में लंड कामिनी के गर्भाशय के मुँह तक जा रहा था। उन्होंने दोनों निप्पल मुँह में लिए और चूसते रहे। दाँत से काटते रहे। कामिनी के हाथ माधव की पीठ पर खुजलाने लगे।
“कोख में वीर्य डाल दूंगा आज,” माधव ने कहा। उनकी गति और तेज हो गई। चारपाई चरमरा रही थी। कामिनी की चुत से पानी की आवाज आ रही थी। चुत में उंगली पहले ही उसे तैयार कर चुकी थी। अब लंड उसे पूरी तरह खोल रहा था।
माधव अचानक रुक गए। लंड सबसे अंदर था। उन्होंने कमर जोर से दबाई और वीर्य छोड़ना शुरू किया। गाढ़ा, गर्म वीर्य कामिनी की कोख में उड़ेल दिया। एक के बाद एक फव्वारे। कामिनी का शरीर काँप रहा था। उसकी चुत लंड को निचोड़ रही थी। वीर्य से भरी चुत हो गई।
माधव ने लंड अंदर ही रखा। वीर्य बाहर नहीं निकलने दिया। उन्होंने कामिनी के माथे पर चुम्बन किया। “अब तू पापा की रंडी बेटी है।”
कामिनी रो रही थी लेकिन उसके कूल्हे अभी भी हिल रहे थे। लंड निकालने पर सफेद वीर्य उसकी चुत से बहने लगा और जाँघों तक आ गया।
अगली सुबह मम्मी घर वापस आईं। कुछ नहीं पता चला।
तीन दिन बाद मम्मी फिर निकलीं। इस बार दोपहर को। माधव ने कामिनी को खिड़की के पास खड़ा किया। खिड़की खुली थी। नीचे गली दिख रही थी। माधव ने पीछे से कामिनी की साड़ी उठाई। उसकी चुत पहले से गीली थी। उन्होंने दो उंगलियाँ अंदर कीं। कामिनी खिड़की की सिल से हाथ पकड़े खड़ी थी।
“पापा देखो… मैं हस्तमैथुन कर रही हूँ,” कामिनी ने कहा और अपनी उंगली भी चुत में डाल ली। दोनों की उंगलियाँ एक साथ अंदर-बाहर हो रही थीं।
माधव ने अपना लंड निकाला और कामिनी के मुँह में ठूंस दिया। कामिनी ने घुटनों के बल बैठकर लंड चूसा। गला तक लिया। लार टपक रही थी। माधव ने उसके सिर को पकड़कर जोर से आगे-पीछे किया। मुँह में लंड की आवाज आ रही थी।
फिर उन्होंने कामिनी को खड़ा किया। पीछे से लंड चुत में घुसा दिया। खिड़की के पास चुदाई शुरू हुई। हर धक्के में कामिनी की छातियाँ खिड़की से टकरा रही थीं। निप्पल काँच से रगड़ खा रहे थे। माधव एक हाथ से उसके निप्पल मरोड़ रहे थे। दूसरा हाथ उसकी गांड पर थप्पड़ मार रहा था।
“बॉलीवुड पोर्नस्टार बेटी जैसी दिख रही है तू,” माधव ने कहा। कामिनी की आवाज दबाने के लिए उन्होंने उसके मुँह में दो उंगलियाँ डाल दीं।
चुदाई लंबी चली। माधव ने कई बार गति बदली। कभी धीरे, कभी बहुत तेज। कामिनी का पहला पानी निकल गया। चुत और ज्यादा गीली हो गई। माधव ने लंड निकाला और कामिनी को घुमाया। अब आमने-सामने थे। उन्होंने कामिनी को उठाया। उसकी टाँगें उनकी कमर के चारों ओर लिपट गईं। खड़ी चुदाई शुरू हुई। लंड फिर चुत में चला गया।
माधव दीवार से सटाकर कामिनी को चोद रहे थे। हर बार लंड गर्भाशय तक जा रहा था। “आज पक्का गर्भवती बना दूंगा,” उन्होंने कहा। कामिनी के नाखून उनकी पीठ में गड़ गए।
दूसरी बार वीर्य आया। फिर से कोख में। माधव ने लंड अंदर रखते हुए कामिनी को बिस्तर तक ले गए। वहाँ उन्होंने उसे घोड़ी बनाई। गांड ऊपर। फिर से लंड गांड में डाला। इस बार आसानी से चला गया। गांड-चुदाई जोरदार हुई। माधव ने दोनों हाथों से उसकी गांड के गोल हिस्सों को मसलते हुए थप्पड़ मारे।
रात भर चुदाई चली। तीसरी बार चुत में वीर्य डाला। कामिनी की चुत अब पूरी तरह ढीली और वीर्य से भरी थी। सफेद तरल उसके छेद से लगातार रिस रहा था।
एक हफ्ते बाद फिर मौका मिला। मम्मी रिश्तेदारों के घर गई थीं। पूरा दिन खाली था। माधव ने कामिनी को नंगा किया। कामसूत्र की मुद्राएँ आजमाईं। पहले कामिनी को अपनी गोद में बैठाया। लंड चुत में था। कामिनी खुद ऊपर-नीचे हो रही थी। उसके स्तन माधव के मुँह में आ-जा रहे थे। निप्पल चूसना जारी रहा।
फिर माधव ने कामिनी को पीठ के बल लिटाया। एक टाँग अपने कंधे पर, दूसरी फैलाई। तिरछी चुदाई। लंड चुत की एक साइड को ज्यादा रगड़ रहा था। कामिनी पागल हो रही थी। “पापा… और जोर से… मेरी गीली चुत फाड़ दो…”
माधव ने वैसा ही किया। थप्पड़ उसके जाँघों पर पड़ रहे थे। लाल निशान पड़ गए। उन्होंने कामिनी की चुत में लंड रखते हुए एक उंगली उसकी गांड में डाल दी। दोनों छेद एक साथ भरे हुए थे। कामिनी का शरीर काँप उठा। पानी की धार निकल गई।
माधव ने लंड निकाला और कामिनी के मुँह पर रख दिया। कामिनी ने चूसा। वीर्य का स्वाद अभी भी उस पर था। फिर माधव ने उसे चारपाई के किनारे लिटाया। खड़े होकर चोदा। इस बार बहुत गहरा। हर धक्के में कामिनी की आवाज घर में गूँज रही थी।
आखिरी बार माधव ने कामिनी को अपनी छाती पर लिटाया। लंड चुत में था। उन्होंने उसके दोनों निप्पल जोर से चूसे और उसी समय वीर्य छोड़ा। गाढ़ा वीर्य फिर से कोख में समा गया। कामिनी की चुत निचोड़ रही थी। वीर्य बाहर नहीं आने दिया जा रहा था।
कामिनी थक कर माधव की छाती पर लेट गई। उसके शरीर से पसीना और वीर्य दोनों बह रहे थे। “पापा… अब हर बार मम्मी के जाते ही यही करना,” उसने धीरे से कहा। “मैं आपकी हरामी बेटी हूँ। मेरी चुत हमेशा आपके मोटे लंड के लिए गीली रहेगी।”
माधव ने उसके बाल सहलाए। लंड अभी भी अंदर था। धीरे-धीरे फिर तनने लगा। शाम तक चुदाई रुकी नहीं। खिड़की के पास एक बार और। फिर रसोई की सिल पर। कामिनी की पीठ सिल से रगड़ खा रही थी। निप्पल ठंडे पत्थर से चिपक गए थे।
रात को आखिरी बार उन्होंने कामिनी को बाथरूम में चोदा। शीशे के सामने। कामिनी अपना प्रतिबिंब देख रही थी। पापा पीछे से उसे चोद रहे थे। दोनों हाथ उसके स्तनों पर थे। निप्पल मरोड़ रहे थे। लंड चुत में तेजी से चल रहा था। कामिनी ने शीशे पर हाथ रखा। “पापा देखो… आपकी रंडी बेटी कैसी चोद रही है…”
माधव ने आखिरी वीर्य भी उसकी कोख में उड़ेल दिया। कामिनी की टाँगें काँप रही थीं। वीर्य उसकी जाँघों से फर्श पर टपक रहा था।
उस दिन के बाद नियम बन गया। मम्मी जैसे ही दरवाजे से निकलतीं, माधव कामिनी को पकड़ लेते। कभी चुपचाप, कभी कामिनी खुद कमरे का दरवाजा बंद कर देती। परिवारिक चुदाई अब रोजमर्रा का हिस्सा था। बाप-बेटी इनसेस्ट जारी रहा। हर बार कोख में वीर्य जाता। हर बार कामिनी की गीली चुत पापा के मोटे लंड से भर जाती।
कामिनी अब इंतजार करती। मम्मी के जाने की आहट सुनते ही उसकी चुत गीली होने लगती। माधव का लंड तन जाता। फिर वही होता। खिड़की के पास, थप्पड़ के साथ, उंगली के साथ, मुँह में, गांड में, चुत में। रात भर कभी-कभी। वीर्य से भरी चुत लेकर कामिनी सो जाती। अगली सुबह मम्मी के आने से पहले नहा लेती। लेकिन अंदर का वीर्य पूरी तरह नहीं निकलता।
यह सिलसिला चलता रहा। माधव अब जानबूझकर कामिनी को अपनी पत्नी समझने की बात नहीं करते थे। वे साफ जानते थे कि यह उनकी सौतेली बेटी है। और हर बार मम्मी के जाते ही वे उसे चोदते थे। पूरा, गहरा, वीर्य तक। कामिनी भी अब मांगने लगी थी। “पापा, आज गांड में डालो पहले। फिर चुत में पूरा वीर्य छोड़ देना। मुझे गर्भवती बना दो।”
माधव वैसा ही करते। हर बार। जब तक मम्मी घर वापस नहीं आ जातीं।
This is an original creative work by Salty Vixen. This story/article, including its characters, plot, and descriptive content, is protected by copyright law. Unauthorized copying, sharing, reposting, or reproduction in any format is strictly prohibited. This content may not be used for AI training, data scraping, machine learning, or any form of artificial intelligence development without explicit written permission from Salty Vixen Publishing LLC. Violators will be pursued to the fullest extent of the law.

