चंडीगढ़ की ठंडी शाम में सुखना लेक के किनारे सूरज डूब रहा था। कबीर बाईस साल का कॉलेज स्टूडेंट था। उसे शहर की कलात्मक ऊर्जा बहुत पसंद थी—सेक्टरों की सीधी सड़कें, पेड़ों की छाँव और लेक का शांत पानी। हाथ में कैमरा था, लेकिन आज उसका ध्यान फोटो पर नहीं था।
तभी उसने देखा—मेहर।
पैंतालीस साल की मेहर काली सलवार कमीज में थीं। सलवार उनके मोटे कूल्हों और जांघों पर कसकर चढ़ी हुई थी। बड़ी-बड़ी छातियाँ कमीज के अंदर दबाई हुई थीं, निप्पल की नोक साफ दिख रही थी। वे लोकल फोटोग्राफर और आर्टिस्ट थीं, शहर की जड़ों से जुड़ी हुई। और… कबीर की माँ।
पापा पिछले दो साल से दुबई में थे। घर में सिर्फ माँ और बेटा।
“माँ…” कबीर ने आवाज़ दी।
मेहर मुड़ीं। उनकी आँखों में आज कुछ अलग चमक थी। “आ गया मेरे बेटे? चल, बैठ। आज शराब पीएँगे। बहुत बात करनी है।”
वे लेक के किनारे बैंच पर बैठ गए। मेहर ने बैग से वाइन की बोतल निकाली। दो गिलास भरे। शराब के नशे में बातें गहरी और गंदी होती गईं। निषिद्ध पारिवारिक सेक्स की बात, इच्छाओं की बात, पापा की अनुपस्थिति की बात।
तीसरे गिलास के बाद मेहर ने अचानक कहा, “शादी तय हो गई है। टोरंटो वाले अमीर एनआरआई से। नाम है प्रिया। तीन महीने बाद शादी।”
कबीर का चेहरा उतर गया। “माँ, मत करो। प्लीज। मैं नहीं सह सकता तुम्हें किसी और के साथ।”
मेहर ने मुस्कुराते हुए वाइन का घूँट भरा और कबीर की जांघ पर हाथ रख दिया। “तो फिर एक आइडिया है। तू मेरी मदद कर। जो मैं कहूँ वो कर। पूरा। तो मैं इस शादी से बाहर निकलने का रास्ता निकाल लूँगी। वरना… शादी तय है। और तू सिर्फ देखता रह जाएगा।”
कबीर की साँस तेज हो गई। “क्या करना होगा?”
मेहर ने सलवार की नाड़ा थोड़ी ढीली की। उनकी उँगली अंदर जाकर अपनी चूत सहला रही थी। “आज रात घर पर। नशे में। और जो मैं कहूँ। तू मेरा ककल्ड बनेगा। मेरी गांड और चूत दोनों दूसरों से चुदवाऊँगी। तू देखेगा। और बीच-बीच में तू भी चोदेगा। मना किया तो शादी हो जाएगी।”
कबीर ने सिर हिलाया। उसकी गाँठ पहले से ही सख्त हो चुकी थी।
घर पहुँचते ही मेहर ने दरवाजा बंद कर लॉक लगा दिया। वाइन की चौथी बोतल खुल चुकी थी। दोनों अच्छे खासे नशे में थे।
मेहर ने खड़े-खड़े सलवार की नाड़ा खोली और उसे नीचे सरका दिया। काली सलवार उनके पैरों में पड़ी रही। बिना पैंटी के उनकी मोटी चूत और गहरे बाल दिख रहे थे। उन्होंने कमीज भी उतार दी। बड़ी-बड़ी छातियाँ बाहर आ गईं, निप्पल काले और कड़े।
“सलवार देख, बेटे,” उन्होंने कहा। “अब इसे पहनने की जरूरत नहीं। आजा।”
मेहर बिस्तर पर लेट गईं और टाँगें फैला दीं। “माँ पैर फैलाती है बेटे के लिए। देख, कितनी गीली हो चुकी हूँ।”
कबीर घुटनों के बल उनके पास आया। पहले उसने हाथ से माँ की चूत सहलाई—हैंडजॉब। दो उँगली अंदर डालकर तेजी से हिलाने लगा। मेहर कराह उठीं। “हाँ… ऐसे ही… और जोर से।”
फिर कबीर ने अपना लंड निकाला। मेहर ने तुरंत मुँह खोल दिया। ब्लोजॉब शुरू हुआ। उनके बड़े-बड़े होंठ लंड के चारों ओर बंद हो गए। गहरी चुसकी। गला तक ले जा रही थीं। थूक लंड पर बह रहा था। कबीर के हाथ उनके बालों में थे।
“देशी मम्मी बेटा सेक्स… चूस मेरा लंड,” कबीर ने गुर्राते हुए कहा।
मेहर ने लंड को मुँह से निकाला, लार टपक रही थी। “आज और लोग आएंगे। मैंने बुलाया है। तेरे दोस्त। बाइसेक्सुअल हैं सब। एनाल गैंगबैंग होगा। तू देखेगा। ककल्ड की तरह। और कभी-कभी तू भी शामिल होगा।”
दरवाजे पर खटखटाहट हुई। तीन लड़के अंदर आए—कबीर के कॉलेज के दोस्त। सबके पास मासिव कॉक थे। उन्होंने कपड़े उतार दिए।
मेहर बिस्तर पर घोड़ी बन गईं। “आजाओ। पहले मेरी गांड खोलो।”
एक लड़के ने व्हीप्ड क्रीम की कैन निकाली और मेहर की गांड के छेद पर लगाई। सफेद क्रीम उनकी गांड पर फैल गई। फिर उसने अपना मोटा लंड गांड में धंसाना शुरू किया। एनाल। धीरे-धीरे, फिर जोर से। मेहर चीख उठीं। “आह्ह… कितना मोटा… और अंदर!”
दूसरे लड़के ने मेहर का मुँह पकड़ लिया और अपना लंड अंदर ठूंस दिया। तीसरे ने कबीर को घुटनों पर बैठाया और अपना लंड उसके मुँह में दे दिया। “चूस, ककल्ड। अपनी माँ को चुदते हुए देख।”
कबीर मजबूरन लंड चूसने लगा। बाइसेक्सुअल खेल। उसकी आँखों के सामने माँ की गांड में मोटा लंड अंदर-बाहर हो रहा था। व्हीप्ड क्रीम लंड के साथ मिलकर झाग बन रही थी।
एक लड़के ने मेहर की चूत में भी लंड डाल दिया। दोनों होल भरी हुईं। डबल पेनिट्रेशन। मेहर की चीखें कमरे में गूँज रही थीं। “चोदो… माँ को चोदो… बेटे के सामने!”
कबीर का मुँह लंड से भरा था। कभी वह लंड चूस रहा था, कभी माँ की तरफ देख रहा था। निषिद्ध पारिवारिक सेक्स अपने चरम पर था।
थोड़ी देर बाद पोजीशन बदली। मेहर को पीठ के बल लिटाया गया। एक लड़का उनकी गांड में, दूसरा चूत में, तीसरा मुँह में। कबीर को बगल में घुटनों के बल बैठाया गया। एक लड़के ने उसका हाथ पकड़कर अपने लंड पर फिरवाया—हैंडजॉब। फिर कबीर को फिर से मुँह में लेना पड़ा।
व्हीप्ड क्रीम दोबारा लगाई गई। मेहर की छातियों पर, निप्पल पर, चूत पर, गांड पर। लड़के क्रीम चाट-चाटकर चोद रहे थे। एक ने मेहर के मुँह में झड़ लिया। उन्होंने पूरा निगल लिया। दूसरे ने उनकी गांड में गहराई तक झड़ दिया। तीसरे ने कबीर के चेहरे पर।
“चाट अपने चेहरे से,” मेहर ने आदेश दिया। कबीर ने अपनी जीभ से वीर्य चाटा और निगला।
अब बारी कबीर की थी। मेहर ने कहा, “अब तू आजा। माँ की गांड में डाल। जो पहले से खुली हुई है।”
कबीर ने अपनी माँ की लाल और खुली हुई गांड में लंड धंसा दिया। एनाल। गर्म, चिकना, निषिद्ध। मेहर जोर से कराह उठीं। “हाँ बेटे… पूरा अंदर… माँ की गांड तेरी है आज!”
कबीर तेजी से धकिया रहा था। बाकी लड़के इंतजार में थे। एक ने फिर से मेहर का मुँह ले लिया। दूसरे ने कबीर की गांड सहलानी शुरू कर दी। बाइसेक्सुअल टच।
गैंगबैंग जारी रहा। राउंड के बाद राउंड। मेहर की दोनों होल बार-बार भरी गईं। व्हीप्ड क्रीम बार-बार लगाई और चाटी गई। कबीर कभी माँ को चोद रहा था, कभी दूसरे लंड चूस रहा था, कभी माँ का ब्लोजॉब ले रहा था।
एक समय ऐसा आया जब मेहर कबीर के चेहरे पर बैठ गईं। फेससिटिंग। उनकी मोटी चूत कबीर के मुँह पर दब गई। “चाट… अपनी माँ की चूत चाट… जबकि ये लोग मेरी गांड चोद रहे हैं।”
कबीर की जीभ अंदर तक जा रही थी। ऊपर से दो मोटे लंड बारी-बारी गांड में घुस रहे थे। मासिव कॉक उसकी माँ को फैला रहे थे।
घंटों बाद कमरा वीर्य, पसीने और व्हीप्ड क्रीम की गंध से भारी हो चुका था। मेहर बिस्तर पर पूरी तरह फैली हुई थीं। शरीर पर लाल निशान, गांड खुली और सूजी हुई, चूत से वीर्य रिस रहा था, मुँह के आसपास सूखा हुआ वीर्य।
उन्होंने कबीर को पास बुलाया। “आजा बेटे। अब सिर्फ तू। धीरे-धीरे।”
कबीर ने माँ की थकी हुई चूत में लंड डाल दिया। इस बार धीरे। आँखों में आँखें डालकर। मेहर ने उसके चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
“देशी मम्मी बेटा सेक्स… ये हमारी सच्चाई है,” उन्होंने फुसफुसाया। “शादी रद्द हो जाएगी। मैं प्रिया को कह दूँगी कि मुझे कोई और मिल गया है… मेरा अपना बेटा।”
कबीर ने जोर से धक्का मारा और माँ के अंदर ही झड़ गया। मेहर ने उसे कसकर जकड़ लिया।
बाद में दोनों नंगे ही लेटे रहे। लड़के जा चुके थे। मेहर ने कबीर का सिर अपनी बड़ी छाती पर रख लिया। उनका काला निप्पल उसके मुँह में था।
“कल फिर,” मेहर ने धीरे से कहा। “पापा दूर हैं। और अब तू मेरा असली मर्द है। जब चाहे माँ की गांड और चूत ले सकता है। और जब चाहे… दूसरों को भी बुला सकते हैं।”
कबीर ने निप्पल चूसते हुए सिर हिलाया। उसकी उँगली माँ की अभी भी खुली हुई गांड में घुस गई।
मेहर मुस्कुराईं। “हाँ… ऐसे ही। निषिद्ध पारिवारिक सेक्स अब हमारी रोज की जिंदगी है।”
बाहर चंडीगढ़ की रात शांत थी। अंदर, पापा की अनुपस्थिति में, माँ और बेटा एक-दूसरे में खोए हुए थे—गंदे, थके, और पूरी तरह संतुष्ट।


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