बास्तर में 1324 स्टाइल माँ-बेटा चुदाई by Salty Vixen

बास्तर में 1324 स्टाइल माँ-बेटा चुदाई by Salty Vixen

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अंक एक: कमांडर की वापसी

बास्तर के घने जंगल उस साल और भी अँधेरे और खतरनाक लग रहे थे। 1324 ईस्वी। वारंगल के पतन के बाद काकतीय वंश की अंतिम राजकुमारी रानी मयूरी ने इस कठोर भूमि पर अपना नया राज्य खड़ा किया था। पचास वर्ष की आयु में भी उनकी अदा राजसी थी। बड़े-बड़े, भारी और गोल स्तन, चौड़ी कमर, तेज आँखें और राजनीतिक बुद्धिमत्ता जो किसी पुरुष योद्धा को भी पीछे छोड़ दे। लेकिन उनके हृदय में एक पुराना घाव हमेशा हरा रहता था—उनका पहला पुत्र, जो वारंगल के पतन के दौरान शिशु अवस्था में ही गायब हो गया था।

इधर अबुझमाड़ के घने जंगलों में पला-बढ़ा विक्रम अट्ठाईस वर्ष का एक भयानक योद्धा बन चुका था। नायक की उपाधि धारण करने वाला यह युवा अपनी विशाल काया, लोहे जैसे शरीर और अद्भुत युद्ध कौशल के लिए जाना जाता था। उसके पास एक रहस्यमय जन्मचिह्न था और एक पुराना ताबीज, जिसे उसने बचपन से गले में पहना हुआ था। उसे अपनी असलियत का कोई ज्ञान नहीं था। वह सिर्फ इतना जानता था कि वह एक आदिवासी सरदार के पाले हुए बेटे की तरह जंगलों में बड़ा हुआ है।

एक दिन शाही काफिले पर दुश्मनों का घात हुआ। विक्रम ने अकेले ही बीस से अधिक योद्धाओं को धूल चटा दी। उसकी तलवार बिजली की तरह चमक रही थी। खबर शाही दरबार जगदलपुर पहुँची। रानी मयूरी ने उसे बुलाया।

जब विक्रम दरबार में खड़ा हुआ तो मयूरी की नजरें उसकी मजबूत छाती, चौड़े कंधों और उस शक्तिशाली शरीर पर टिक गईं। कुछ अजीब सा खिंचाव महसूस हुआ—जैसे कोई पुरानी याद अचानक जाग पड़ी हो। उन्होंने उसे अपना व्यक्तिगत रक्षक और सैन्य कमांडर नियुक्त कर दिया।

“तुम्हारा नाम?” मयूरी ने पूछा।

“विक्रम, महारानी।”

“आज से तुम मेरे पास रहोगे। राज्य की सुरक्षा तुम्हारे हाथों में है।”

महीनों बीत गए। विक्रम महल में रहने लगा। वह रानी के साथ बैठकों में जाता, सीमाओं का दौरा करता, और रात को महल की सुरक्षा का जिम्मा लेता। मयूरी उसकी वफादारी और बुद्धिमत्ता देखकर प्रभावित होतीं। विक्रम मयूरी की राजनीतिक चतुराई और मजबूत व्यक्तित्व पर मुग्ध होता। दोनों के बीच एक गहरी, अनकही समझ बनने लगी।

अंक दो: निषिद्ध आकर्षण

एक शाम, जब दोनों अकेले महल के उद्यान में थे, मयूरी ने विक्रम का हाथ पकड़ लिया।

“तुम मेरे लिए सिर्फ कमांडर नहीं हो, विक्रम। तुम… कुछ और हो।”

विक्रम की नजरें उनकी विशाल छातियों पर चली गईं। मयूरी की साड़ी के नीचे बड़े-बड़े, गोल और भारी स्तन साफ उभर रहे थे। उसके अंदर एक अजीब सी आग जल उठी।

कुछ दिनों बाद राज्य पर फिर संकट आया। विरोधी गुट आक्रमण की तैयारी कर रहे थे। विजय के लिए दोनों दंतेश्वरी माता के मंदिर गए। रात का अंधेरा था। मंदिर में सिर्फ दीपक जल रहे थे। हवा में अगरबत्ती की गंध तैर रही थी।

तनाव चरम पर था। मयूरी ने विक्रम को करीब खींच लिया।

“आज रात… मैं तुम्हें चाहती हूँ।”

विक्रम का विशाल लिंग तुरंत तन गया। उसकी धोती के नीचे भारी, लंबा और मोटा लंड साफ उभर आया। मयूरी की आँखें फटी की फटी रह गईं।

“यह… कितना बड़ा है…” उन्होंने फुसफुसाया।

मयूरी ने अपनी साड़ी खोल दी। उनके विशाल, गोल और भारी स्तन बाहर निकल आए। गुलाबी निप्पल्स तने हुए थे। विक्रम घुटनों के बल बैठ गया और एक स्तन को मुँह में ले लिया। उसने जीभ से निप्पल को चाटना शुरू किया, फिर जोर-जोर से चूसने लगा। मयूरी कराह उठीं।

“हाँ… और जोर से चूसो… अह्ह…”

विक्रम दोनों स्तनों को बारी-बारी से चाटता और चूसता रहा। उसकी बड़ी हथेलियाँ मयूरी की कमर पर फिसल रही थीं। मयूरी की चूत पूरी तरह भीग चुकी थी।

फिर मयूरी ने विक्रम की धोती खोल दी। विक्रम का विशाल, मोटा, लंबा और नसों से भरा लंड बाहर निकल आया—काली नसें फूली हुईं, अग्रभाग चमक रहा था। मयूरी ने उसे दोनों हाथों से पकड़ा।

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“इतना बड़ा… कैसे समाएगा…”

फिर भी उन्होंने मुँह खोलकर लंड के सिरे को अपने होठों में ले लिया। जीभ से चाटते हुए उन्होंने उसे गहराई तक लेने की कोशिश की। विक्रम कराह उठा।

मयूरी बिस्तर की तरह मंदिर के पत्थर के फर्श पर लेट गईं। पैर फैला दिए। उनकी गीली चूत खुल गई। विक्रम ने अपना विशाल लंड उनके प्रवेश द्वार पर रखा और धीरे-धीरे धकेलना शुरू किया।

“आह्ह… धीरे… बहुत मोटा है… अह्ह… पूरा अंदर डाल दो!”

जब पूरा लंड अंदर समा गया तो मयूरी की आँखें बंद हो गईं। विक्रम ने धीरे-धीरे गति बढ़ाई। हर धक्के के साथ मयूरी के बड़े स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। विक्रम एक हाथ से स्तनों को मसल रहा था, दूसरे हाथ से मयूरी की कमर पकड़े हुए जोर-जोर से चोद रहा था।

“कितनी टाइट… अह्ह…”

“हाँ… और जोर से… पूरी तरह भर दो!”

उस रात वे तीन बार जुड़े। पहली बार सामान्य आसन में, दूसरी बार मयूरी ने घुटनों के बल होकर कुत्ते की तरह चुदाई करवाई, और तीसरी बार विक्रम ने मयूरी को गोद में बैठाकर ऊपर-नीचे किया। हर बार विक्रम का विशाल लंड मयूरी की गहराई तक पहुँच रहा था। अंत में जब विक्रम आया तो उसका गाढ़ा, गर्म वीर्य मयूरी के गर्भ में भर गया।

उस रात के बाद दोनों के बीच एक गुप्त संबंध शुरू हो गया। महल के अंदर, जंगल के शिविरों में, और कभी-कभी मंदिर में वापस जाकर वे एक-दूसरे को भोगते रहे। मयूरी विक्रम के विशाल लंड को चूसतीं, चाटतीं और अपनी चूत में लेतीं। विक्रम माँ जैसी उम्र की उस रानी के बड़े स्तनों को दूध की तरह चूसता और उनकी चूत को अपने मोटे लंड से फाड़ता रहता। दोनों को लगता था कि यह कोई पूर्व जन्म का बंधन है।

अंक तीन: सच और विनाश

कुछ हफ्तों बाद एक बूढ़ा पुजारी वारंगल से आया। उसने विक्रम के ताबीज और जन्मचिह्न को पहचाना।

रात को उसने अकेले मयूरी को बुलाया।

“महारानी… यह युवक… आपका खोया हुआ पुत्र है। आपका पहला बेटा।”

मयूरी की दुनिया थम गई। उनके पैर लड़खड़ा गए। जो युवक पिछले कई महीनों से उनकी छाती चूस रहा था, उनकी चूत फाड़ रहा था… वही उनका अपना बेटा था!

सुबह विक्रम आया। मयूरी के चेहरे पर आँसू देखकर वह घबरा गया।

“क्या हुआ?”

मयूरी ने काँपती आवाज में कहा, “विक्रम… तुम… तुम मेरे बेटे हो। मेरा खोया हुआ पहला पुत्र।”

विक्रम की आँखें फटी रह गईं। उसके सामने खड़ी महिला… जिसकी बड़े-बड़े स्तन उसने रात-रात भर चूसे थे, जिसकी चूत उसने अपने विशाल लंड से फाड़ी थी… वही उसकी माँ थी।

दोनों घंटों तक चुप रहे। फिर विक्रम ने मयूरी को गले लगा लिया।

“मैं… मैं तुम्हें अब भी चाहता हूँ। यह पाप है… लेकिन मैं रुक नहीं सकता।”

उस रात फिर से वे एक हुए। इस बार जानते हुए। मयूरी रोते-रोते विक्रम के विशाल लंड को अपनी चूत में लेती रहीं। विक्रम माँ के बड़े स्तनों को चूसते हुए चोदता रहा।

“माँ… तुम्हारी चूत… अभी भी मेरी है…”

“बेटा… अपनी माँ को और चोदो… अह्ह… माँ की चूत में अपना वीर्य डाल दो…”

सच छिपाना असंभव था। राज्य का कलंक बचाने के लिए विक्रम ने स्वयं निर्वासन चुना। वह सीमा के सबसे खतरनाक क्षेत्रों का कमांडर बनकर चला गया।

मयूरी सिंहासन पर बैठी रहीं। दोनों का प्रेम, पाप और दर्द हमेशा उनके हृदय में दफन रहा।

रातें लंबी थीं। मयूरी अकेले अपने बड़े स्तनों को सहलातीं और विक्रम के विशाल लंड की याद में कराहतीं। विक्रम जंगल में माँ की चूत और उसके मीठे स्तनों की याद में अपना लंड हिलाता।

उनका प्रेम शापित था… लेकिन अनंत भी।



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