प्रिया शर्मा बाहर से एकदम परफेक्ट भारतीय माँ थीं — उम्र ४२ साल, गेहुँआ रंग, लंबे काले बाल जो आमतौर पर ढीले जूड़े में बंधे रहते थे, भारी स्तन जो सूती साड़ी में फंसकर उभर आते थे, और चौड़े कूल्हे जो चलते वक्त हल्के से हिलते थे। मुंबई के शांत इलाके में पड़ोसियों के लिए वे एक विधवा माँ थीं, जिन्होंने पति की अचानक मौत के बाद अकेले बेटे को पाला था।
लेकिन घर के अंदर, खासकर आधी रात के बाद, प्रिया कुछ और ही खतरनाक थीं।
उनका बेटा राहुल, २१ साल का, अब एक लंबा, मांसल जवान बन चुका था — जिम से चौड़े कंधे, तेज जबड़ा, और भूखी निगाहें जो महीनों से अपनी माँ के बदन पर रुकने लगी थीं। वह लड़ रहा था, बहुत कोशिश कर रहा था। लेकिन हर बार जब प्रिया झुककर कुछ उठातीं या रात की पतली नाइटी में रसोई में खड़ी होतीं, राहुल का लंड उसके शॉर्ट्स में तन जाता।
सब कुछ शुरू हुआ एक गर्म जुलाई की रात को। बिजली चली गई थी। छत का पंखा बंद पड़ा था। राहुल सिर्फ बॉक्सर में लेटा पसीना बहा रहा था। उसका कमरा का दरवाजा थोड़ा खुला था।
“मम्मी?” उसने धीरे से पुकारा।
प्रिया दरवाजे पर प्रकट हुईं। पहनी हुई थी बिना आस्तीन की सफेद नाइटी, जो मुश्किल से जांघों के बीच तक पहुँचती थी। पतड़ा कपड़ा पसीने से उनके बदन से चिपक गया था। भारी स्तन साफ दिख रहे थे, काले निप्पल उभरे हुए। बाल खुले हुए एक कंधे पर लहरा रहे थे।
“बाबू, गर्मी बहुत है ना?” उन्होंने फुसफुसाकर कहा और अंदर आ गईं। “मुझे भी नींद नहीं आ रही।”
वे राहुल के बेड के किनारे बैठ गईं। गद्दा धंस गया। राहुल को उनकी महक सूंघाई दी — जैस्मिन साबुन और एक गर्म, उत्तेजित औरत की प्राकृतिक गंध। उसका लंड फड़क उठा।
प्रिया ने नोटिस किया। उनकी नजर एक पल के लिए नीचे गई, फिर वापस चेहरा पर। दोनों ने कुछ नहीं कहा।
वे उसके बगल में लेट गईं। “थोड़ी देर के लिए… जब तक बिजली आती है।”
वे अंधेरे में बगल-बगल लेटे रहे। कुछ मिनट बीते। फिर प्रिया हिलीं, उनकी मोटी जांघ राहुल के खड़े लंड को छू गई। वे जमी रह गईं।
“राहुल…” उनकी आवाज मुश्किल से सांस थी।
“सॉरी मम्मी,” राहुल फुसफुसाया, शर्म और भयानक उत्तेजना के साथ।
प्रिया पीछे नहीं हटीं। बल्कि उनकी उंगलियाँ धीरे से बढ़ीं। उन्होंने बॉक्सर के ऊपर से उसकी बड़ी गांठ को छुआ।
“कितना बड़ा हो गया है मेरा बेटा…” वे खुद से बुदबुदाईं। उनकी आवाज में अजीब, भारीपन था।
राहुल का दिल जोरों से धड़क रहा था। वह उनकी तरफ मुड़ा। हल्की चांदनी में उसने अपनी माँ की आँखें देखीं — गहरी, अपराधबोध से भरी, लेकिन वही निषिद्ध भूख जल रही थी।
“मम्मी… मैं…”
पूरा वाक्य पूरा होने से पहले प्रिया के नरम होंठ उसके होंठों पर थे। किस पहले झिझक भरा था, फिर हताशा भरा। उनकी जीभ उसके मुंह में घुस गई और वे धीरे से कराह उठीं। राहुल के हाथ अपने आप बढ़ गए — एक हाथ ने उनके भारी स्तन को पकड़ लिया, नाइटी के ऊपर से मांस को दबाया, दूसरा हाथ नीचे जाकर उनके रसीले गांड को पकड़ लिया।
वे लंबे मिनटों तक भूखे जानवरों की तरह किस करते रहे, जीभें नाच रही थीं, लार मिल रही थी। प्रिया का हाथ उसके बॉक्सर के अंदर चला गया और उन्होंने उसके मोटे, नसदार लंड को पकड़ लिया।
“ओहह… बेटा… इतना मोटा…” उन्होंने उसके मुंह में ही सांस ली, धीरे-धीरे उसे सहलाते हुए।
राहुल कराह उठा। उसने उनकी नाइटी ऊपर खींच दी, उनकी बिना बालों वाली चूत उजागर हो गई — चिकनी, पहले से ही रिस रही थी। जब उसने पहली बार अपनी उंगलियों से अपनी माँ की गीली फांकों को छुआ, प्रिया जोर से काँप उठीं।
“छू बेटा मम्मी की चूत… देख कितनी गीली हो रही है तेरे लिए।”
राहुल की उंगलियाँ उनकी भीगी स्लिट में घूमीं, सूजे हुए क्लिट को रगड़ने लगीं। प्रिया ने कंधे में काट लिया ताकि उनकी कराह बाहर न निकले। उनकी कमर उसकी उंगलियों पर हिलने लगी।
वे रुक नहीं सकते थे।
प्रिया ने उसे पीठ के बल लिटाया और ऊपर चढ़ गईं। उन्होंने नाइटी सिर के ऊपर से उतार फेंकी। अब वे पूरी नंगी थीं — भारी, लटकते स्तन, काले निप्पल, नरम पेट, और चौड़े प्रजनन वाले कूल्हे।
उन्होंने राहुल का बॉक्सर नीचे खींचा। उसका मोटा लंड बाहर छलांग मारकर खड़ा हो गया — ८ इंच लंबा, मोटा, नसों से भरा, सिर से पहले ही रस टपक रहा था।
प्रिया ने उसे देखा और उनकी आँखें चमक उठीं। “मेरा बेटा… मेरा अपना खून… इतना सुंदर लंड।”
वे झुकीं और बिना एक शब्द कहे मुंह में ले लिया। गर्म, गीला मुंह। राहुल ने सिसकारी भरी। प्रिया का सिर ऊपर-नीचे होने लगा, गहरी चूस रही थीं, जीभ लंड के सिर पर घुमा रही थीं।
“मम्मी… ओहह मम्मी…” राहुल के हाथ उनके बालों में थे।
कुछ मिनट बाद प्रिया ऊपर आईं। उन्होंने अपने घुटनों के बल बैठकर राहुल के लंड पर अपनी चूत को रगड़ा। गर्म, गीला स्पर्श। फिर धीरे-धीरे वे बैठ गईं।
“आहहहह!!” दोनों एक साथ कराह उठे।
राहुल का मोटा लंड अपनी माँ की तंग, गर्म चूत में पूरा घुस गया। प्रिया की आँखें बंद हो गईं, मुंह खुला। वे कुछ पल रुकीं, महसूस करती रहीं कि उनका बेटा उनमें पूरी तरह भर गया है।
फिर वे हिलने लगीं। धीरे-धीरे ऊपर-नीचे। उनके भारी स्तन उछल रहे थे। राहुल नीचे से जोर से धक्के मार रहा था। कमरा उनकी चुप्पी भरी कराहों, चूत की चिकनी आवाजों और चमड़ी के टकराने की आवाज से भर गया।
“चोद बेटा… अपनी मम्मी को चोद… जो तू पैदा हुआ है उसी चूत को…” प्रिया फुसफुसा रही थीं, आँखें आधी बंद।
राहुल ने उन्हें पलट दिया। अब वे कुत्ते की मुद्रा में थीं। उसने पीछे से पकड़ा, उनके चौड़े कूल्हों को थामकर जोर-जोर से ठोका। हर धक्के पर प्रिया की चूत से रस निकल रहा था, जांघों पर बह रहा था।
“हां बेटा… और जोर से… फाड़ दो मम्मी की चूत… आहहह!!”
राहुल ने उनके बाल पकड़े, सिर पीछे खींचा और तेजी से चोदने लगा। उनके स्तनों को नीचे से दबाते हुए।
पहली बार दोनों साथ ही झड़ गए। राहुल का गर्म वीर्य अपनी माँ की चूत के अंदर फूटा। प्रिया काँपती रही, उनकी चूत सिकुड़-सिकुड़कर लंड को दबा रही थी।
वे एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए। पसीने से तर। अपराधबोध और संतोष दोनों महसूस हो रहा था।
“हमने गलत किया बेटा…” प्रिया फुसफुसाईं।
“लेकिन मम्मी… मैं फिर चाहता हूँ…” राहुल ने कहा।
प्रिया मुस्कुराईं। “मैं भी…”
उस रात के बाद उनकी गुप्त चुदाई शुरू हो गई।
हर रात, जब पड़ोसी सो जाते, प्रिया अपने बेटे के कमरे में चली जातीं। कभी वे उसे चूसतीं, कभी वह उनकी चूत चाटता। कभी वे ६९ मुद्रा में एक-दूसरे को चूसते। राहुल ने अपनी माँ को हर तरीके से चोदा — मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल, स्टैंडिंग, बाथरूम में, रसोई में जब दिन में घर खाली होता।
एक रात प्रिया ने कहा, “बेटा, आज मम्मी को गांड भी मारनी है।”
राहुल उत्तेजित हो गया। प्रिया घुटनों के बल बैठीं, कूल्हे ऊपर किए। राहुल ने उनकी गांड पर थूक लगाया, फिर धीरे से अपना मोटा लंड उनके टाइट गुदा में घुसाया।
“आहहह… धीरे बेटा… पहली बार है…” प्रिया कराह रही थीं।
जब पूरा घुस गया तो राहुल ने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। कुछ देर बाद प्रिया भी जोर से हिलने लगीं। “चोदो… अपनी माँ की गांड चोदो… भरो वीर्य से…”
राहुल ने उनकी गांड भर दी।
महीनों बीत गए। उनकी गुप्त चुदाई और गहरी होती गई। प्रिया अब बिना पैंटी घर में घूमतीं ताकि राहुल जब चाहे उन्हें पीछे से चोद सके। वे अक्सर कहतीं, “बेटा, मम्मी की चूत तेरे लंड के बिना अधूरी है।”
एक दिन प्रिया ने गर्भनिरोधक बंद कर दिए। “अब जो होना है हो। अगर मेरा बेटा मुझे गर्भवती कर दे तो भी मैं खुश।”
राहुल ने उन्हें कई बार बिना कंडोम के चोदा। उनके अंदर वीर्य डाला।
उनकी चुदाई अब सिर्फ सेक्स नहीं थी — प्यार, कब्जा, और गहरी निषिद्ध चाहत थी।
समाप्त

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