कमला देवी की उम्र बयालीस साल थी। उनका बेटा आयुष तेईस का हो चुका था। पिताजी पिछले तीन महीने से दुबई में थे। माँ-बेटा अकेले भुवनेश्वर आए थे। लिंगराज मंदिर के दर्शन करने के बहाने।
सुबह का समय था। लिंगराज मंदिर का विशाल शिखर सूरज की पहली किरणों में चमक रहा था। ग्यारहवीं सदी का यह शिव मंदिर पूरे शहर पर राज करता था। कमला ने सफेद साड़ी पहनी थी, माथे पर लाल बिंदी, बालों में चमेली के फूल। आयुष उसके पीछे-पीछे चल रहा था। उसकी नजर बार-बार माँ की पतली कमर और साड़ी के नीचे उभरती गांड पर जा रही थी।
मंदिर के अंदर घंटियाँ बज रही थीं, पुजारी मंत्रोच्चार कर रहे थे, हवा में चंदन और अगरबत्ती की गंध फैली हुई थी। कमला ने आँखें बंद करके शिवजी के सामने हाथ जोड़े। आयुष उसके बगल में खड़ा था। उसकी साँसें तेज हो रही थीं। माँ की साड़ी का पल्लू थोड़ा खिसक गया था। आयुष की निगाह माँ की गहरी गर्दन पर अटक गई।
दर्शन के बाद वे मंदिर के बाहर निकले। गर्मी बढ़ रही थी। कमला ने कहा, “होटल चलो बेटा। नहा-धोकर आराम करेंगे।”
होटल लिंगराज मंदिर से सिर्फ दस मिनट की दूरी पर था। कमरा उन्होंने एक ही बुक किया था। दो बेड थे, लेकिन दोनों जानते थे कि आज रात वे एक ही बेड पर सोएँगे।
कमरे में आते ही कमला ने साड़ी का पल्लू खोल दिया। आयुष दरवाजा बंद करके खड़ा रहा। उसकी निगाह माँ के शरीर पर थी। कमला ने मुड़कर देखा। बेटे की आँखों में वही भूख थी जो पिछले कई महीनों से बढ़ती जा रही थी।
“क्या देख रहा है?” कमला की आवाज धीमी थी।
आयुष ने कोई जवाब नहीं दिया। वह आगे बढ़ा। उसकी बड़ी हथेलियाँ माँ की कमर पर रख दीं। कमला पीछे नहीं हटी। आयुष ने उसे दीवार से सटा दिया और उसके होंठ चूस लिए। कमला की साँस अटक गई। बेटे का मुँह उसकी गर्दन पर लग गया, फिर कंधे पर, फिर साड़ी के अंदर हाथ घुस गया।
“पापा नहीं हैं…” कमला फुसफुसाई।
“आज नहीं हैं माँ।” आयुष ने जवाब दिया और साड़ी खींचकर नीचे गिरा दी।
कमला सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई। आयुष ने ब्लाउज के हुक खोले। माँ के बड़े, भारी स्तन बाहर आ गए। उसने एक स्तन मुँह में लिया और जोर से चूसा। कमला की कमर ऐंठ गई। उसकी उंगलियाँ बेटे के बालों में फँस गईं।
आयुष ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। पेटीकोट खींचकर फेंक दिया। कमला की चूत पहले से गीली थी। बेटे ने दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। कमला ने कराहते हुए टाँगें फैला दीं।
“इतनी गीली हो गई माँ?” आयुष ने पूछा।
कमला ने आँखें बंद कर लीं। “तुम्हारी वजह से।”
आयुष ने अपनी पैंट उतारी। उसका मोटा लंड सीधा खड़ा था। उसने माँ की टाँगों के बीच घुटने टेक दिए और लंड को चूत के मुँह पर रगड़ा। फिर एक झटके में अंदर घुसा दिया।
कमला चीख उठी। “आह्ह… धीरे बेटा… माँ की चूत फट जाएगी…”
आयुष नहीं रुका। वह जोर-जोर से धक्के मारने लगा। कमला के स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। बिस्तर चरमरा रहा था। आयुष ने माँ के दोनों हाथ सिर के ऊपर पकड़ लिए और और गहराई तक घुसता गया।
“माँ की चूत कितनी टाइट है,” वह हाँफते हुए बोला। “पापा को कभी इतनी अच्छी नहीं लगी होगी।”
कमला शर्म से लाल हो गई थी लेकिन उसकी चूत बेटे के लंड को और कस रही थी। वह अपनी कमर उठा-उठाकर मिल रही थी।
आयुष ने उसे पलटा। कमला चारों हाथ-पैरों पर आ गई। बेटे ने पीछे से फिर घुसा दिया। इस बार और गहरा। उसने माँ की गांड के दोनों गाल फैलाए और लंड को चूत में पूरा डुबो दिया। कमला तकिए में मुँह दबाकर कराह रही थी।
“और जोर से मारो बेटा… माँ की चूत मारो…”
आयुष ने कमर पकड़कर तेज चुदाई शुरू कर दी। पसीना दोनों के शरीर पर चमक रहा था। कमरे में सिर्फ मांस की आवाज और कराहने की आवाज गूँज रही थी।
कमला का पहला ऑर्गेज्म आया। उसकी चूत जोर से ऐंठने लगी। आयुष रुक नहीं पाया। उसने और तेजी से धक्के मारे और माँ की चूत के अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य की धारें अंदर भर गईं।
वह बाहर निकला तो सफेद तरल माँ की टाँगों से बहने लगा। आयुष ने दो उंगलियों से उसे वापस अंदर ठूस दिया।
वे दस मिनट भी आराम नहीं कर पाए। कमला ने खुद बेटे के लंड को मुँह में ले लिया। वह चाट रही थी, चूस रही थी, अपनी ही चूत का रस चाट रही थी। आयुष फिर से सख्त हो गया।
इस बार कमला ऊपर बैठ गई। उसने लंड को अपनी चूत में बैठाया और खुद हिलने लगी। उसके बड़े स्तन आयुष के चेहरे के सामने झूल रहे थे। बेटे ने दोनों निप्पल मुँह में लिए और काटने लगा।
कमला पागलों की तरह बैठकर चुदवा रही थी। “बेटा… माँ को गर्भवती कर दो… पापा को मत बताना…”
आयुष ने उसकी कमर पकड़कर नीचे से जोर लगाया। कमला दूसरी बार झड़ गई। उसकी चूत से पानी निकल रहा था। आयुष ने उसे उल्टा कर दिया और इस बार उसकी गांड में घुसने की कोशिश की।
कमला ने पहले मना किया, फिर टाँगें और फैला दीं। आयुष ने थूक लगाया और धीरे-धीरे गांड में घुसा। कमला की आँखों से आँसू निकल आए लेकिन उसने पीछे नहीं हटा। बेटे का पूरा लंड उसकी गांड में समा गया।
आयुष ने गांड की चुदाई भी उतनी ही जोर से की। कमला के मुँह से अब सिर्फ अश्लील आवाजें निकल रही थीं। तीसरी बार जब आयुष आया तो उसने माँ की गांड के अंदर ही वीर्य छोड़ दिया।
रात भर यही चलता रहा। मंदिर की घंटियाँ दूर से सुनाई दे रही थीं। कमरे में माँ-बेटा एक-दूसरे को खा रहे थे। कमला कभी बेटे के ऊपर, कभी नीचे, कभी चारों खाने चित। आयुष ने माँ की हर जगह चुदाई की—चूत, मुँह, गांड।
सुबह चार बजे जब वे थककर लेटे तो कमला के शरीर पर बेटे के नाखूनों के निशान थे और उसकी चूत और गांड दोनों से वीर्य रिस रहा था।
आयुष ने माँ को अपनी छाती से लगा लिया। कमला ने धीमी आवाज में कहा, “कल फिर मंदिर चलेंगे। उसके बाद फिर यही करेंगे।”
आयुष ने उसकी गांड सहलाते हुए जवाब दिया, “जब तक पापा नहीं आते, हर रात यही होगा माँ।”
कमला मुस्कुराई। लिंगराज मंदिर के शिखर पर सूरज निकल रहा था। होटल के कमरे में माँ-बेटा फिर से एक-दूसरे में उलझ गए।


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