माँ की पहली रात बेटे के साथ – दिल्ली की गुप्त कहानी by Salty Vixen

माँ की पहली रात बेटे के साथ – दिल्ली की गुप्त कहानी by Salty Vixen

📖 1 min read

रमा ४२ साल की थीं। दिल्ली के वसंत विहार में एक अच्छा-खासा तीन कमरे का फ्लैट, पति सरकारी नौकरी में व्यस्त, दिन-रात ऑफिस और टूर पर। बेटा राहुल २१ साल का, दिल्ली यूनिवर्सिटी में बी.टेक फाइनल ईयर। बाहर से देखने में रमा एक साधारण गृहिणी लगती थीं – साड़ी पहनतीं, पूजा करतीं, पड़ोसियों से बातें करतीं। लेकिन अंदर से वो अकेली थीं। पति के साथ सालों से कोई अंतरंगता नहीं। रातें खाली, मन उदास।

एक शाम राहुल कॉलेज से लौटा तो रमा किचन में थीं। राहुल ने चुपके से अपना लैपटॉप खोला और एक पुरानी आदत पूरी की – माँ-बेटे वाली पोर्न वीडियो। वो सोचता था कोई नहीं देखेगा। लेकिन रमा चाय लेकर कमरे में आईं और दरवाजा खुला था। स्क्रीन पर एक औरत बेटे को चोद रही थी। राहुल घबरा गया, लैपटॉप बंद करने लगा।

रमा रुक गईं। उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, ब्लाउज से ब्रा की लाइन दिख रही थी। वो बोलीं, “राहुल… ये क्या देख रहा है तू?”

राहुल का चेहरा लाल हो गया। “मम्मी… सॉरी… बस ऐसे ही…”

रमा ने चाय टेबल पर रखी और दरवाजा बंद कर लिया। वो बेटे के पास बैठ गईं। उनकी आवाज नरम थी, लेकिन आँखों में कुछ अलग था। “बेटा, शर्माने की क्या बात है? मम्मी समझती है। तू जवान हो गया है। ये सब नॉर्मल है।”

राहुल ने सिर झुका लिया। “मम्मी… मैं… मैं कभी किसी लड़की के साथ…”

रमा ने उसका हाथ पकड़ा। “कोई बात नहीं। मम्मी है ना तेरे साथ।”

उस रात रमा ने कुछ नहीं कहा। लेकिन अगले दिन शाम को जब पति फिर टूर पर गए, रमा ने राहुल को अपने कमरे में बुलाया। वो लाल साड़ी में थीं, ब्लाउज टाइट, साड़ी का पल्लू कंधे से सरका हुआ।

“बैठ बेटा,” उन्होंने कहा। “मम्मी तुझे कुछ सिखाना चाहती हैं।”

राहुल का दिल धड़क रहा था। रमा ने अपना पल्लू धीरे से गिराया। ब्लाउज के ऊपर से ब्रा की लेस दिख रही थी। “देख… मम्मी की चूचियाँ। तूने कभी किसी को छुआ नहीं ना?”

राहुल ने सिर हिलाया। रमा ने उसका हाथ उठाकर अपनी चूची पर रख दिया। “दबा… ऐसे… हल्के से।”

राहुल की उंगलियाँ काँप रही थीं। रमा की चूचियाँ नरम, गर्म। वो सिसकारी लीं। “अच्छा लग रहा है बेटा… और जोर से।”

राहुल ने दबाया। रमा ने आँखें बंद कीं। “अब ब्लाउज खोल।”

राहुल ने हुक खोले। ब्रा बाहर आई – काली लेस वाली। रमा ने ब्रा भी उतार दी। उनकी भूरी चूचियाँ सामने थीं, निप्पल्स सख्त। “चूम बेटा… मम्मी की चूचियों को।”

राहुल ने झुककर चूमा। जीभ से निप्पल चाटा। रमा ने उसके सिर को दबाया। “चूस… जोर से… जैसे बच्चा चूसता था।”

राहुल ने चूसा। रमा की सिसकारियाँ बढ़ गईं। उनकी साड़ी का पल्लू गिर गया, पेटीकोट से नाभि दिख रही थी। रमा ने राहुल का हाथ नीचे ले जाकर अपनी जाँघ पर रखा। “यहाँ… ऊपर… मम्मी की चूत पर।”

राहुल का हाथ काँप रहा था। रमा ने पेटीकोट ऊपर किया। कोई पैंटी नहीं थी। उनकी चूत गीली, भूरी, बालों से ढकी। “छू… उँगली डाल।”

राहुल ने उंगली डाली। गर्म, गीली। रमा चीखीं। “अंदर… और अंदर… ऐसे घुमा।”

राहुल ने उंगली घुमाई। रमा की कमर उछल रही थी। “अब जीभ से… मम्मी की चूत चाट।”

Read this hot story:
The Summer Of "98"-Incest Story by Salty Vixen

राहुल झुका। जीभ से चाटा। नमकीन, गर्म स्वाद। रमा ने उसके सिर को दबाया। “अंदर… जीभ डाल… चूस मेरी चूत।”

राहुल ने जीभ डाली। रमा चीखीं। “हाँ बेटा… ऐसे ही… मम्मी को चोद दे जीभ से।”

कुछ मिनट बाद रमा ने राहुल को ऊपर खींचा। “अब अपनी पैंट उतार।”

राहुल ने उतारी। उसका लंड सख्त, बड़ा। रमा ने उसे हाथ में लिया। “वाह… मेरा बेटा कितना बड़ा हो गया।”

रमा ने लंड को सहलाया, चूमा। “अब मम्मी के अंदर डाल।”

रमा लेट गईं, टाँगें फैलाईं। राहुल ऊपर आया। लंड को चूत पर रगड़ा। रमा बोलीं, “धीरे… पहली बार है मम्मी का भी।”

राहुल ने धकेला। लंड अंदर गया। रमा चीखीं। “आह… बेटा… धीरे… मम्मी की चूत फट रही है।”

राहुल ने धीरे-धीरे अंदर-बाहर किया। रमा की चीखें सिसकारियों में बदल गईं। “जोर से… चोद मम्मी को… तेरी मम्मी है मैं… पूरी चोद दे।”

राहुल ने स्पीड बढ़ाई। कमरे में थप्पड़ की आवाजें। रमा की चूत गीली, लंड पर चिपक रही थी। “हाँ बेटा… मम्मी को चोद… अंदर डाल दे अपना पानी।”

राहुल ने जोर से धकेला। रमा चीखीं और आईं। चूत कस गई। राहुल भी झड़ गया – गर्म पानी माँ की चूत में।

दोनों हाँफते हुए लेटे रहे। रमा ने बेटे को गले लगाया। “अब से हर रात… मम्मी तेरी होगी। पापा को पता नहीं चलेगा।”

राहुल ने हामी भरी। “हाँ मम्मी… मैं तुम्हें रोज चोदूँगा।”

उस रात के बाद दिल्ली की गुप्त रातें शुरू हुईं। माँ और बेटे की चुदाई – कभी किचन में, कभी बालकनी पर, कभी पति के बिस्तर पर। रमा ने बेटे को हर तरह से सिखाया – चूत चाटना, गांड मारना, ६९ करना। और राहुल ने माँ को संतुष्ट किया।

हर शाम जब पति ऑफिस से लौटते, रमा मुस्कुराकर कहतीं, “आज राहुल ने बहुत अच्छा पढ़ाई की।” और रात में बेटे के कमरे में चुपके से जातीं। राहुल की उंगलियाँ अब मम्मी की चूत में माहिर हो गई थीं। रमा की सिसकारियाँ घर में गूंजतीं, लेकिन कोई नहीं सुनता।

एक दिन रमा ने राहुल को कहा, “बेटा, अब तू मम्मी की गांड भी मार।” राहुल ने पहले हिचकिचाया, लेकिन रमा ने लुब्रिकेंट लगाकर खुद को तैयार किया। पहली बार दर्द हुआ, लेकिन फिर मजा आया। राहुल ने जोर-जोर से पेला, रमा चीखीं, “हाँ बेटा… मम्मी की गांड फाड़ दे… पूरी भर दे।”

राहुल ने अंदर झड़ दिया। रमा ने मुस्कुराकर कहा, “अब तू मेरा पूरा मर्द है।”

और इस तरह दिल्ली की एक साधारण गृहिणी और उसका बेटा एक गुप्त प्रेमी बन गए। बाहर दुनिया उन्हें माँ-बेटा समझती, अंदर वो एक-दूसरे के शरीर को हर रात चखते।

 

Salty Vixen
© 2026 Salty Vixen Publishing LLC. All Rights Reserved.

This is an original creative work by Salty Vixen. This story/article, including its characters, plot, and descriptive content, is protected by copyright law. Unauthorized copying, sharing, reposting, or reproduction in any format is strictly prohibited. This content may not be used for AI training, data scraping, machine learning, or any form of artificial intelligence development without explicit written permission from Salty Vixen Publishing LLC. Violators will be pursued to the fullest extent of the law.