माँ बेटा सेक्स स्टोरी मम्मी बेटे की गुप्त चुदाई हिंदी इनसेस्ट कहानी by Salty Vixen

माँ बेटा सेक्स स्टोरी | मम्मी बेटे की गुप्त चुदाई | हिंदी इनसेस्ट कहानी – by Salty Vixen

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मेहरुन्निसा की उम्र पैंतालीस के करीब थी, लेकिन शरीर अभी भी किसी जवान औरत जैसा लचीला और भरा-पूरा था। गोल-मटोल जाँघें जो साड़ी के नीचे से हिलती थीं, भारी स्तन जो ब्लाउज़ के अंदर हमेशा दबाव डालते रहते, पतली कमर और वो मोटी, बालों वाली चूत जो पिछले तीन महीनों से पूरी तरह सूखी पड़ी थी। पति दुबई में थे। तीन महीने हो गए थे। घर में सिर्फ वो और ज़रयाब। बाईस साल का बेटा। लंबा, कंधे चौड़े, छाती पर हल्के बाल, और आँखों में वो भूख जो माँ को दिन-रात सताती रहती थी।

ज़रयाब जानता था कि माँ नहाते वक्त दरवाज़ा आधा खुला छोड़ देती है। वो जानता था कि रात को जब माँ अपने कमरे में लेटी होती है तो कभी-कभी धीरे-धीरे उंगलियाँ अपनी चूत में घुमाती है और उसके नाम का फुसफुसाहट निकालती है। और मेहरुन्निसा जानती थी कि बेटा रात में उसके कमरे के बाहर खड़ा होता है। कभी-कभी दरवाज़े की दरार से देखता है जब वो नहाकर निकलती है और तौलिया सिर्फ कमर तक बाँधे रहती है। दोनों जानते थे। दोनों भूखे थे। दोनों पागल हो रहे थे।

दिल्ली की गर्मी में हवेली का पुराना हिस्सा ठंडा रहता था। वहाँ एक विशाल भूलभुलैया था। दीवारें मोटी, रास्ते उलझे हुए, लगभग हजारों छोटे-छोटे गलियारे। और सबसे खास बात — दीवारें आवाज़ को ले जाती थीं। फुसफुसाहट दूर तक साफ सुनाई देती। कोई चीखे तो पूरी भूलभुलैया गूँज उठे। मेहरुन्निसा ने उसी जगह को चुना।

उस शाम उसने ज़रयाब को बुलाया। “आ जा बेटा… आज भूलभुलैया घूमते हैं। अकेले। पापा नहीं हैं। कोई नहीं है।”

ज़रयाब की साँस तेज़ हो गई। माँ के शरीर की खुशबू — चंदन, पसीना और हल्की सी योनि की गंध — उसे पहले से ही पागल किए हुए थी। दोनों चुपचाप भूलभुलैया के अंदर घुस गए। रोशनी बहुत कम थी। दीवारें ठंडी और नम। मेहरुन्निसा आगे चल रही थी। उसकी साड़ी का पल्लू कमर पर बाँधा हुआ था, पीठ नंगी, और नीचे से साड़ी जाँघों पर चिपक रही थी। हर कदम पर उसकी गाँड हिल रही थी।

“माँ…” ज़रयाब की आवाज़ सिर्फ फुसफुसाहट में निकली।

दीवार ने आवाज़ को आगे पहुँचा दिया। मेहरुन्निसा ने साफ सुना। मुस्कुराई। रुक गई। “बोल ना बेटा… दीवारें सुन रही हैं। कोई और नहीं सुन सकता।”

ज़रयाब पास आया। पीछे से। उसके हाथ मेहरुन्निसा की कमर पर रखे। उंगलियाँ साड़ी के नीचे घुस गईं। “तुम्हारी गाँड कितनी गोल है माँ… रोज देखता हूँ। रोज रात हिलाता हूँ अपना लंड तुम्हारी सोचकर। तुम्हारी चूत की कल्पना करके झड़ता हूँ।”

मेहरुन्निसा की साँस अटक गई। सालों की भूख एक साथ जाग उठी। उसने पीछे हाथ बढ़ाया और ज़रयाब के लंड को पकड़ लिया — जो पहले से ही सख्त था, पैंट के अंदर से धड़क रहा था। मोटा, लंबा, गर्म। “इतना बड़ा हो गया है… माँ की चूत में कैसे घुसेगा? सालों से किसी ने नहीं मारा मेरी चूत। पापा भी अब मुश्किल से महीने में एक बार करते हैं।”

ज़रयाब ने साड़ी ऊपर कर दी। पैंटी नीचे खींची। मेहरुन्निसा की मोटी, बालों वाली चूत हवा में आ गई। उंगलियाँ घुसीं — गीली थी। बहुत गीली। पानी टपक रहा था। “माँ… तू पहले से भीगी हुई है। इतनी गीली… जैसे किसी रंडी की चूत।”

“तेरे लिए भीगी हूँ बेटा… रोज रात सोचती हूँ कि तू आकर मेरी चूत चाट ले। अपनी मोटी जीभ अंदर डाल दे। मेरे निप्पल काट ले। मेरी गाँड में उँगली डाल दे।”

ज़रयाब घुटनों के बल बैठ गया। जीभ बाहर निकाली और माँ की चूत पर लगा दी। मेहरुन्निसा की कमर लचक गई। दीवार पर दोनों हाथ टिकाए उसने लंबी कराह निकाली। “आह्ह्ह… ज़रयाब… ऐसे ही चाट… माँ की चूत को और गीला कर दे… जीभ अंदर डाल… हाँ… वहीं… क्लिट को चूस…”

ज़रयाब की जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। वो चूस रहा था, चाट रहा था, दाँत से हल्के से काट रहा था। मेहरुन्निसा की जाँघें काँप रही थीं। पानी उसकी ठोड़ी पर टपक रहा था। “बेटा… तेरी जीभ… पापा ने कभी ऐसे नहीं चाटा… कभी इतनी देर तक नहीं चूसा… और ज़ोर से चूस… माँ झड़ने वाली है…”

मेहरुन्निसा का पहला ऑर्गेज्म आया। उसकी चूत सिकुड़ी, जाँघें बंद हुईं, और वो दीवार से लिपट गई। ज़रयाब ने फिर भी चाटना बंद नहीं किया। वो माँ का पानी पी रहा था।

फिर वो उठ खड़ा हुआ। पैंट खोली। लंड बाहर निकला — मोटा, नसों वाला, लंबा, सिर चमक रहा था। मेहरुन्निसा ने मुड़कर देखा और मुँह खोल दिया। “मुँह में ले माँ… पूरा।”

मेहरुन्निसा घुटनों पर बैठ गई। बेटे का लंड मुँह में लिया। गला भर गया। आँखों से पानी आने लगा लेकिन वो चूसती रही। लार टपक रही थी, ठोड़ी गीली हो गई थी। वो गला तक ले जा रही थी। ज़रयाब के हाथ उसके बालों में थे। “चूस… और तेज़… माँ की तरह चूस… अपनी ही औलाद का लंड चूस रही है तू… कितनी रंडी बन गई है मेरी माँ…”

थोड़ी देर बाद ज़रयाब ने खींचा। मेहरुन्निसा को दीवार के सहारे खड़ा किया। साड़ी कमर तक उठाई। जाँघें फैलाईं। लंड चूत पर रखा। सिर से पानी की धार टपक रही थी। “अब अंदर डालूँगा माँ… पहली बार। अपनी माँ की चूत में अपना लंड घुसेड़ूँगा।”

“डाल… धीरे… आह्ह्ह… हाँ… अंदर… पूरा अंदर…”

सिर घुसा। फिर आधा। फिर पूरा। मेहरुन्निसा की आँखें बंद हो गईं। इतना भरपूर, इतना गहरा। सालों बाद किसी ने उसकी चूत इतनी अच्छे से भरी थी — और वो भी उसका अपना बेटा। दीवारें उनकी कराहें ले जा रही थीं।

ज़रयाब धक्के लगाने लगा। पहले धीरे, फिर तेज़। दीवारें गूँज रही थीं। उनकी कराहें भूलभुलैया के हर कोने में फैल रही थीं। “माँ की चूत… कितनी टाइट है… पापा की नहीं, मेरी है अब… ये चूत सिर्फ मेरे लंड के लिए बनी है…”

“हाँ बेटा… तेरी है… मार… और ज़ोर से मार… माँ की चूत फाड़ दे… आह्ह्ह… और गहरा…”

धक्के तेज़ हो गए। ज़रयाब के अंडे माँ की गाँड से टकरा रहे थे। छप-छप की आवाज़ पूरे गलियारे में गूँज रही थी। मेहरुन्निसा की स्तन साड़ी के अंदर से उछल रहे थे। ज़रयाब ने ब्लाउज़ के बटन खोल दिए। बड़े-बड़े निप्पल मुँह में ले लिए। काटने लगा, चूसने लगा। “आह्ह्ह… काट… निप्पल काट बेटा… और ज़ोर से… माँ की छातियों को निचोड़…”

चूत की आवाज़ — छप-छप-छप — भूलभुलैया में गूँज रही थी। मेहरुन्निसा की पीठ दीवार से रगड़ खा रही थी। “मैं झड़ने वाली हूँ… माँ… अंदर झाड़ूँ? अपनी माँ की कोख में अपना वीर्य भर दूँ?”

“हाँ… अंदर… माँ की कोख में भर दे अपना वीर्य… पूरा… एक बूँद बाहर मत निकालना… आह्ह्ह… मैं भी झड़ रही हूँ…”

ज़रयाब जोर से धक्का मारकर झड़ गया। गर्म वीर्य की मोटी धारें माँ की चूत में भर गईं। मेहरुन्निसा भी उसी समय झड़ गई। उसकी चूत सिकुड़-सिकुड़कर बेटे का लंड निचोड़ रही थी। दोनों पसीने से तर थे। साँसें फूल रही थीं। वीर्य चूत से बाहर रिसकर जाँघों पर बह रहा था।

लेकिन ये सिर्फ शुरुआत थी।

ज़रयाब ने लंड बाहर नहीं निकाला। वो अंदर ही रहा। धीरे-धीरे फिर से सख्त होने लगा। मेहरुन्निसा हैरान रह गई। “फिर से…? इतनी जल्दी?”

“माँ… तीन महीने से सिर्फ तुम्हारी सोचकर झड़ रहा हूँ। आज असल चूत मिली है। आज रात भर मारूँगा।”

उसने मेहरुन्निसा को घुमाया। दीवार के सहारे झुका दिया। साड़ी पूरी ऊपर कर दी। गाँड फैलाई। लंड फिर से चूत में घुसा। इस बार पीछे से। और भी गहरा। “आह्ह्ह… बेटा… इतना गहरा… मेरी कोख तक पहुँच रहा है…”

ज़रयाब ने दोनों हाथों से माँ की गाँड के लोथड़े फैलाए और जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ मेहरुन्निसा की स्तन दीवार से टकरा रहे थे। “माँ की गाँड देख… कितनी मोटी… कितनी मुलायम… आज मैं गाँड भी मारूँगा।”

“मार… मार ले… आज सब कुछ तेरा है… चूत भी, गाँड भी, मुँह भी…”

थोड़ी देर बाद ज़रयाब ने लंड निकाला। चूत से वीर्य की मोटी लकीरें बह रही थीं। उसने लंड माँ की गाँड की दरार पर रखा। थूक लगाई। धीरे-धीरे दबाव दिया। “आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन मत रुक… डाल… पूरा डाल…”

सिर घुसा। मेहरुन्निसा चीखी। दीवारें चीख को और तेज़ करके वापस लाईं। ज़रयाब ने धीरे-धीरे पूरा लंड गाँड में धकेल दिया। “माँ की गाँड… कितनी टाइट… चूत से भी टाइट…”

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फिर धक्के शुरू हुए। पहले धीमे, फिर तेज़। मेहरुन्निसा की आँखों से आँसू बह रहे थे लेकिन मुँह से कराहें निकल रही थीं। “मार… और मार… माँ की गाँड फाड़ दे… बेटा…”

ज़रयाब ने एक हाथ आगे बढ़ाकर माँ की चूत में उंगलियाँ घुसा दीं। दूसरी तरफ से गाँड मार रहा था। मेहरुन्निसा पागल हो रही थी। दोबारा झड़ गई। उसकी गाँड सिकुड़ी और ज़रयाब भी फिर से झड़ गया — इस बार माँ की गाँड के अंदर।

दोनों थककर फर्श पर गिर पड़े। भूलभुलैया का फर्श ठंडा था। मेहरुन्निसा के शरीर पर बेटे का वीर्य सूख रहा था — चूत में, गाँड में, स्तनों पर, मुँह के कोनों पर, बालों में। ज़रयाब ने माँ के बाल सहलाए। “अब रोज होगा माँ… पापा आने तक मैं तेरी चूत और गाँड रोज मारूँगा। कभी घर में, कभी यहीं भूलभुलैया में।”

मेहरुन्निसा मुस्कुराई। आँखें बंद करके बोली — “और जब पापा आ जाएँ… तब भी। चुपके से। भूलभुलैया में। दीवारें हमारी फुसफुसाहट सुनती रहेंगी… हमारी चुदाई की आवाज़ याद रखेंगी।”

अगली रात

घर वापस आने के बाद भी दोनों शांत नहीं बैठे। रात को दो बजे ज़रयाब माँ के कमरे में घुस गया। मेहरुन्निसा जाग रही थी। इंतज़ार कर रही थी। उसने रज़ाई उठाई। नंगी थी। “आ जा… आज बिस्तर पर।”

ज़रयाब नंगा हो गया। लंड पहले से सख्त था। मेहरुन्निसा ने उसे अपनी जाँघों के बीच लिया। धीरे-धीरे रगड़ने लगी। “कल तूने मेरी चूत और गाँड दोनों मार लीं। आज माँ तुझे चखाएगी।”

वो ज़रयाब के ऊपर चढ़ गई। लंड को अपनी चूत पर रखा और धीरे-धीरे बैठ गई। पूरा अंदर ले लिया। फिर हिलने लगी। ऊपर-नीचे। स्तन ज़रयाब के चेहरे पर झूल रहे थे। उसने दोनों निप्पल मुँह में ले लिए। “चूस… काट… माँ की छातियाँ तेरी हैं…”

मेहरुन्निसा जोर-जोर से हिल रही थी। चूत की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। “देख बेटा… तेरी माँ कैसे चुदवा रही है… कैसे अपनी चूत में तेरा लंड ले रही है… पापा को कभी ऐसा नहीं दिखाया…”

ज़रयाब ने अचानक उसे पलटा। अब वो ऊपर था। जाँघें फैलाकर जोर-जोर से पेलने लगा। बिस्तर चरमरा रहा था। “माँ… मैं तुझे गर्भवती कर दूँगा… रोज अंदर झाड़ूँगा… पापा को शक भी नहीं होगा…”

“कर दे… कर दे गर्भवती… तेरा बच्चा पैदा करूँगी… आह्ह्ह…”

दोनों एक साथ झड़े। वीर्य इतना ज्यादा था कि चूत से बाहर बहकर चादर गीली हो गई।

सुबह होने तक उन्होंने तीन बार और किया। एक बार मेहरुन्निसा ने 69 की पोजीशन में बेटे का लंड चूसा और खुद अपनी चूत उसके मुँह में दी। एक बार ज़रयाब ने माँ को कुर्सी पर बैठाकर जाँघों के बल उठाया और खड़े-खड़े मारा। एक बार आखिर में मेहरुन्निसा ने बेटे के लंड को अपने स्तनों के बीच लेकर मसला जब तक वो फिर से नहीं झड़ गया — इस बार चेहरे पर।

तीसरी रात — भूलभुलैया में वापस

मेहरुन्निसा ने खुद कहा। “आज फिर भूलभुलैया चलते हैं। आज मैं तुझे बाँधने दूँगी।”

वहाँ पहुँचकर उसने एक पुरानी रस्सी निकाली जो हवेली में पड़ी थी। ज़रयाब ने माँ के हाथ पीछे बाँध दिए। फिर आँखों पर कपड़ा बाँध दिया। मेहरुन्निसा अंधी और बेबस खड़ी थी। “अब जो चाहे कर… मैं तेरी रंडी हूँ आज।”

ज़रयाब ने पहले उसकी चूत चाटी। फिर गाँड। फिर दोनों में उंगलियाँ डालकर फैलाया। फिर लंड चूत में डाला और जोर-जोर से मारा। मेहरुन्निसा की चीखें भूलभुलैया में गूँज रही थीं। “आह्ह्ह… बेटा… और ज़ोर से… माँ को अपनी रंडी बना दे… अपनी माँ को चोद… चोद…”

फिर उसने लंड निकाला और माँ के मुँह में ठूंस दिया। मेहरुन्निसा गला भर-भरकर चूस रही थी। लार बह रही थी। “चूस रंडी… अपनी औलाद का लंड चूस…”

आखिर में ज़रयाब ने माँ को फर्श पर लिटाया। जाँघें कंधों तक मोड़ दीं। और पूरा जोर लगाकर चूत में पेलने लगा। हर धक्के के साथ मेहरुन्निसा की गाँड फर्श से उठ रही थी। “ले माँ… ले अपना बेटा… ले उसकी मोटी लौंडा… आह्ह…”

इस बार जब वो झड़ा तो इतना जोर से कि मेहरुन्निसा की चूत से वीर्य की धारें फव्वारे की तरह निकल रही थीं।

उसके बाद भी रुके नहीं। ज़रयाब ने माँ को घोड़ी बनाकर रखा। गाँड में फिर से डाला। इस बार पूरा जोर से। मेहरुन्निसा रो रही थी और मज़े ले रही थी एक साथ। “फाड़ दे… फाड़ दे माँ की गाँड… बेटा…”

अगले कई दिन

हर रात कुछ नया होता। कभी ज़रयाब माँ को किचन में चोदता जब नौकरानी बाजार गई होती। कभी बाथरूम में। कभी छत पर रात के अंधेरे में। लेकिन सबसे ज्यादा वो भूलभुलैया में ही जाते। दीवारें उनकी हर गंदी बात याद रखतीं।

एक रात मेहरुन्निसा ने कहा — “आज तू मुझे अपनी बहन बनाकर चोद। बोल कि मैं तेरी बहन हूँ।”

ज़रयाब मुस्कुराया। “आ जा मेरी छोटी बहन… आज भाई तेरी चूत मारेगा।”

और फिर वही गंदी चुदाई। “बहन की चूत कितनी मस्त है… भाई रोज़ मारेगा…”

मेहरुन्निसा पागल हो जाती। “हाँ भाई… मार… बहन की चूत फाड़ दे…”

एक और रात उन्होंने सास-बहू का खेल खेला। मेहरुन्निसा ने कहा कि वो सास है और ज़रयाब दामाद। “आ जा दामाद… सास की चूत चख…”

ज़रयाब ने पूरे जोश से मारा। “सास की चूत… बहू से भी मस्त…”

हर बार वीर्य अंदर जाता। मेहरुन्निसा की चूत हमेशा भरी रहती। कभी-कभी वो दिन में भी बेटे का लंड चूस लेती जब मौका मिलता। कभी रात को सोते हुए बेटे के लंड पर बैठ जाती और धीरे-धीरे हिलती जब तक वो जाग न जाए और फिर जोर से पेलने लगे।

एक हफ्ते बाद

मेहरुन्निसा अब पूरी तरह खुल चुकी थी। वो खुद बेटे को उकसाती। “आज मेरी चूत में तीन बार झाड़ना है। कम से कम।”

और ज़रयाब करता भी था। एक रात उसने माँ को इतना चोदा कि मेहरुन्निसा चल भी नहीं पा रही थी। सुबह उठते वक्त उसकी चूत और गाँड दोनों सूजी हुई थीं, वीर्य अभी भी रिस रहा था।

भूलभुलैया अब उनका घर बन चुका था। हर कोना उनकी चुदाई की कहानी बताता। दीवारें उनकी कराहें, उनकी गंदी बातें, उनके “माँ की चूत मार”, “बेटा और अंदर”, “गाँड फाड़ दे”, “वीर्य भर दे” — सब याद रखे हुए थीं।

एक रात सबसे लंबी चुदाई हुई। शुरू हुई शाम को सात बजे। खत्म हुई सुबह चार बजे। बीच में उन्होंने सिर्फ पानी पिया। बाकी समय लंड और चूत ही जुड़े रहे। मेहरुन्निसा ने गिनती खो दी कि कितनी बार झड़ी। ज़रयाब ने कम से कम सात-आठ बार अंदर झाड़ा। आखिर में दोनों चादर की तरह भीगे हुए फर्श पर लेटे थे।

मेहरुन्निसा ने बेटे का चेहरा सहलाया। “पापा कब आ रहे हैं?”

“अगले महीने।”

“तब तक… हर रात। और जब आ जाएँ… तो भी। चुपके से। यहीं। दीवारें हमारी बात नहीं फाड़ेंगी।”

ज़रयाब मुस्कुराया। लंड फिर से सख्त होने लगा। “माँ… एक बार और?”

मेहरुन्निसा हँसी। जाँघें फैला दीं। “आ जा… माँ की चूत अभी भी तेरे लिए तैयार है।”

और भूलभुलैया फिर गूँज उठा।

कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पापा आने के बाद भी दोनों मिलते रहे। कभी भूलभुलैया में, कभी रात के अंधेरे में घर के किसी कोने में। मेहरुन्निसा की चूत अब सिर्फ बेटे की थी। और ज़रयाब की भूख कभी खत्म नहीं हुई।

दीवारें अब भी उनकी फुसफुसाहट सुनती हैं — “माँ…”, “बेटा…”, “और अंदर…”, “वीर्य भर दे…”, “गाँड मार…”, “चूत फाड़…”

और भूलभुलैया मुस्कुराता रहता है।

Tip Salty Vixen