सिमरन की उम्र छब्बीस साल थी। शादी को चार साल हो चुके थे। पति राहुल अक्सर बिज़नेस ट्रिप पर रहता था। घर अकेला पड़ जाता था। सिमरन गोरी-चिट्टी, गोल मटोल शरीर वाली, बड़े-बड़े स्तनों वाली और भारी कमर वाली औरत थी। बाल काले लंबे, आँखें काली, और जाँघों के बीच हमेशा हल्की नमी रहती थी।
राहुल को अपनी बीवी का शरीर बहुत पसंद था, लेकिन उससे भी ज़्यादा पसंद था उसे देखना कि दूसरे मर्द उसकी बीवी को कैसे इस्तेमाल करते हैं। उसने सिमरन को धीरे-धीरे तैयार किया था। पहले सिर्फ बातों से, फिर फोटो भेजने से, फिर वीडियो कॉल पर किसी अजनबी के सामने कपड़े उतारने से। आज रात वह असली खेल खेलने वाला था।
राहुल ने अपने दोस्त विक्रम को बुलाया था। विक्रम तैंतीस साल का, मोटा लंड वाला, और सिमरन को बहुत दिनों से घूरता रहता था।
सिमरन नहाकर निकली। सिर्फ एक पतली सफेद साड़ी पहनी थी, नीचे कुछ नहीं। निप्पल साड़ी के पार साफ दिख रहे थे। वह बैठक में आई तो विक्रम पहले से बैठा था। राहुल ने सिमरन को अपने पास बुलाया और साड़ी का पल्लू खींच दिया।
“दिखाओ इसे,” राहुल ने धीरे से कहा।
सिमरन की साँस तेज़ हो गई। उसने साड़ी पूरी खोल दी। नंगी खड़ी हो गई। बड़े-बड़े स्तन, काले निप्पल, चिकनी चूत और मोटी गांड सबके सामने थी। विक्रम का लंड पैंट में तन गया।
राहुल ने सिमरन को विक्रम की गोद में बिठा दिया। “चूसो इसका,” उसने आदेश दिया।
सिमरन घुटनों के बल बैठ गई। विक्रम का मोटा काला लंड निकाला। इतना मोटा था कि मुँह में लेते ही गला भर गया। वह धीरे-धीरे चूसने लगी। थूक टपकने लगा। राहुल पीछे से उसकी गांड सहला रहा था और उंगली चूत में डाले हुए था।
“और गहरा ले,” राहुल बोला। “अच्छी तरह से चाट। आज रात तुझे दोनों लंड लेने हैं।”
सिमरन ने लंड को गले तक ले लिया। आँखों से आँसू निकल आए। विक्रम उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से मुँह में ठोकने लगा। राहुल ने अपनी पैंट खोली और सिमरन की गीली चूत में अपना लंड धंसाने लगा। दोनों तरफ से सिमरन भर गई। एक मुँह में, एक चूत में।
थोड़ी देर बाद विक्रम ने उसे बिस्तर पर लिटाया। राहुल ने उसकी टाँगें फैलाईं। विक्रम ने अपना मोटा लंड सिमरन की टाइट चूत में धकेला। सिमरन चिल्लाई। इतना मोटा पहली बार अंदर जा रहा था। राहुल उसके मुँह में अपना लंड ठूंसता रहा।
विक्रम जोर-जोर से पेलने लगा। सिमरन की चूत की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। गीली-गीली छप-छप। राहुल कभी उसके मुँह में, कभी उसके स्तनों के बीच लंड रगड़ता। सिमरन की आँखें पलक झपकते बंद हो रही थीं।
“अंदर छोड़,” राहुल ने विक्रम से कहा। “मेरी बीवी का स्पर्म बैंक बना। भर दे इसे।”
विक्रम ने गहराई तक धंसाया और मोटा लंड फड़फड़ाते हुए सिमरन की चूत में मोटी-मोटी धारें छोड़ दीं। इतना झाग निकला कि बाहर तक बहने लगा। राहुल तुरंत उसी गंदगी भरी चूत में अपना लंड डालकर और छोड़ने लगा। दोनों के वीर्य मिलकर सिमरन की चूत से टपक रहे थे।
वे रुके नहीं।
विक्रम ने सिमरन को घुटनों के बल किया। राहुल उसके मुँह में लंड देकर बैठा। विक्रम ने इस बार उसकी गांड में लंड लगाने की कोशिश की। सिमरन पहले मना करती रही, फिर राहुल के कहने पर मान गई। धीरे-धीरे गांड खुलती गई। जब पूरा लंड अंदर चला गया तो सिमरन की आवाज़ बदल गई। दर्द और मज़े का मिश्रण।
दोनों मर्द बारी-बारी से उसकी गांड और चूत दोनों इस्तेमाल करते रहे। कभी दोनों एक साथ। एक आगे, एक पीछे। सिमरन के शरीर से सिर्फ वीर्य और पसीना बह रहा था। साड़ी फर्श पर पड़ी हुई थी, पूरी तरह गंदी।
रात भर यह सिलसिला चला। तीन बार विक्रम ने उसकी चूत में छोड़ा, दो बार गांड में। राहुल ने भी कई बार भरा। सिमरन की चूत और गांड दोनों लाल और सूजी हुई थीं। वह बिस्तर पर लेटी हुई थी, टाँगें फैली हुई, दोनों छेदों से सफेद गाढ़ा तरल रिस रहा था।
सुबह जब विक्रम जाने लगा तो राहुल ने सिमरन को उसके लंड पर फिर से बैठा दिया। “एक और बार ले ले। याद रहेगा।”
सिमरन ने थकी हुई हालत में भी लंड अंदर लिया और धीरे-धीरे हिलने लगी। विक्रम ने आखिरी बार उसकी चूत में भर दिया। सिमरन की जाँघों से वीर्य की धारें बह रही थीं।
विक्रम चला गया। राहुल ने सिमरन को गोद में ले लिया। उसकी गंदी चूत सहलाते हुए बोला, “अब से हर हफ्ते ऐसा ही होगा। कभी एक, कभी दो, कभी तीन। तू मेरी बीवी है और मेरी रंडी भी।”
सिमरन ने आँखें बंद करके सिर्फ गर्दन हिलाई। उसके अंदर अभी भी गर्म वीर्य भरा हुआ था। वह जानती थी कि यह सिर्फ शुरुआत है।
अगले दिनों में यह सिलसिला बढ़ता गया। राहुल अपने ऑफिस के दोस्तों को लाता। कभी पड़ोसी को। सिमरन अब साड़ी के नीचे कुछ नहीं पहनती थी। जब भी कोई आता, वह तैयार रहती। कभी फर्श पर घुटनों के बल लंड चूसती, कभी मेज पर लेटकर चूत और गांड दोनों दिलवाती।
एक रात राहुल ने तीन मर्दों को बुलाया। सिमरन को बीच में लिटाकर चारों तरफ से इस्तेमाल किया। एक मुँह में, एक चूत में, एक गांड में, और चौथा इंतज़ार में। बारी-बारी से सबने उसकी दोनों होल्स में छोड़ा। सिमरन की चूत से इतना वीर्य बह रहा था कि चादर पूरी गीली हो गई। वह बार-बार आ रही थी, शरीर काँप रहा था, लेकिन मना नहीं कर रही थी।
राहुल सबसे ज़्यादा मज़ा ले रहा था। अपनी बीवी को इस हालत में देखना उसे पागल कर देता था। सिमरन जब थककर लेट जाती और उसके छेदों से वीर्य रिसता रहता, तो राहुल उसे चाट-चाटकर साफ करता, फिर खुद फिर से भर देता।
सिमरन अब खुद माँगने लगी थी। “आज कोई मोटा वाला लाओ… आज गांड में ज़्यादा चाहिए… आज मुँह में दो-दो लंड एक साथ चाहिए।”
घर अब सिर्फ पति-पत्नी का घर नहीं रह गया था। वह एक छोटी सी रंडीखाना बन चुका था जहाँ सिमरन हर बार और गंदी, और भरी हुई, और इस्तेमाल हुई निकलती।
और राहुल हर बार मुस्कुराता हुआ देखता रहता।


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